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इन दिनों : स्वामी विवेकानंद और धार्मिक कट्टरवाद

स्वामी विवेकानंद वेदांत लेकर विदेश पहुंचे थे, लेकिन उन्हें इस बात का गहरा अहसास था कि सभी धर्म एक ही …

इन दिनों : जाति वह दीमक है जो भारत की आत्मा को चाट रही है

“आजादी की लड़ाई में जाति थोड़ी दबी थी। एकजुटता का बोध बढ़ा था। आजादी के बाद की राजनीति ने जातियों …

इन दिनों : अच्छी शिक्षा के बिना अच्छी राजनीति संभव नहीं 

“वंशीधर को जब नौकरी मिलती है तो उसका परिवार इसलिए खुश होता है कि इस पद में ऊपरी आमदनी बहुत …

इन दिनों : हनुमान जी और आधुनिक बाबा

एक बाबा चले थे हिन्दू राष्ट्र बनाने। तीन दिनों में ही भदभदा कर गिर गये। पांव में छाले, देह में …

इन दिनों : बुद्धिखोर और आधुनिक अंगुलिमाल 

धर्म और पूँजी के खेल में आमजन इस तरह उलझ गया है कि उसकी स्वचेतना समाप्त हो गई है। वह …

इन दिनों : अधसूखी दूबों पर ओस की बूँदें

देश के लोगों को लगने लगा है कि मंदिर ही उनके भविष्य को सँवारेगा। यदि सँवार न सका तो रक्षा …

इन दिनों : है अंधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है

“यह भयावह वक्त है, जब मृत्यु से भी मुनाफा कमाया जा रहा है और मजा यह है कि देश में …

इन दिनों : ताड़ खड़खड़ाते हैं केवल, चील गीध ही गाते

“डॉ लोहिया ने कहा था कि पांच सालों तक जिंदा कौमें इंतजार नहीं करतीं। सच पूछिए तो जिंदा कौमें की …

इन दिनों : अंधेपन की मर्यादा से चकाचौंध आंखें

“जो खिलवाड़ कर रहा है, वह तो जानबूझकर कर रहा है। वह दोषी कम है, उससे ज्यादा दोषी वह है …
एआई द्वारा निर्मित प्रतीकात्मक चित्र

इन दिनों : तोड़ने ही होंगे मठ और किले सब

उन्होंने जिसकी गारंटी दी, वह बर्बाद हो गया। इस बार संविधान की बारी है । उन्होंने संविधान को सिर से …
एआई द्वारा निर्मित प्रतीकात्मक चित्र

इन दिनों : किरण रिजिजू और रामभद्राचार्य के एकरुप सपने 

“माडल लेरिसा नेरी को मालूम ही नहीं है कि चुनाव आयोग उससे कितना प्यार करता है। वह केवल भारत के …

इन दिनों : केंचुआ मुफ्त में बदनाम है 

यह सच है कि केंचुआ में रीढ़ नहीं होती, लेकिन तब भी वह मिट्टी को उपजाऊ बनाता है। वह किसानों …