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इन दिनों : माथे पर मुरैठा और दिमाग में नफ़रत की नदी
आज डॉ० अम्बेडकर का परिनिर्वाण दिवस है और बाबरी मस्जिद को ढाहने का दिवस भी। अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस के दिन …
इन दिनों : मत रो माता, लाल तेरे बहुतेरे
“धरम के वरद पुत्र कितने अधार्मिक हैं! इन्हें वंदे मातरम् का शौक चढ़ा है। मातरम् के पुत्रों को खूब कूटो …
इन दिनों : सैंया भए कोतवाल
सुबह सूरज ठीक से उगा नहीं। सूरज पर कटे-कटे बादल छाये रहे। ठंड के कारण खिड़कियां बंद रहती हैं, इसलिए …
इन दिनों : है गीत अधूरा, तराना अधूरा
जीविका दीदियाँ मछली पालन करेंगी, इसके लिए तालाब बनवाया गया। तालाब में पानी नहीं था तो मुख्यमंत्री के आने के …
इन दिनों : यह नए युग की संसद है साहिबान!
“देश भौंचक है। सरकार क्या केवल अपना एजेंडा चलायेगी और विपक्ष को ही सिरफिरा साबित करेगी। दुर्भाग्य यह है कि …
इन दिनों : आँख के अंधे, नाम नयनसुख
कुछ संत महिलाओं पर लगातार अभद्र टिप्पणियाँ कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। ये …
इन दिनों : गिद्ध और मांस की पोटली की आधुनिक कथा
हमाम में नंगे लोग अगर सबको कपड़े पहनने का आह्वान करे तो उसकी बात कोई क्यों मानेगा? जिसके हाथ अपराधियों …
इन दिनों : असली लोकतंत्र का दृश्य: जेसीबी में लटके युवक
सड़कों के किनारे बसे हुए लोग केवल झुग्गी-झोपड़ियाँ ही नहीं खड़ी करते, बल्कि अपने लिए रोज़ी-रोजगार भी खड़े करते हैं। …
इन दिनों : सामाजिक न्याय और जातिवाद
“देश को तीसरी राह की जरूरत है, जिसके केंद्र में राष्ट्र हो, सभी नागरिकों के लिए उसमें स्पेस हो, जाति …
सच्चिदानंद सिन्हा के रूप में एक समाजवादी धारा का अंत
“सच्चिदा जी ने समाजवाद का जो संस्करण तैयार किया है, उसमें विकेंद्रित लोकतंत्र, परिवेश के अनुकूल प्रौद्योगिकी, गैर-उपभोक्तावादी जीवन-शैली, पर्यावरणीय …
इन दिनों : दिल्ली प्रदूषण का हल है पब्लिक पालिका
“देश का वास्तविक विकास ट्रिक्ल डाउन थ्योरी से नहीं, बल्कि ‘रेनफाल थ्योरी’ के आधार पर होना चाहिए यानी रिस-रिस कर …
इन दिनों : आदिवासी समाज में हलचल के मायने
“आजादी के बाद जनता कमजोर हुई है और तंत्र मजबूत हुआ है। लोकतंत्र के लिए यह बड़ा खतरा है। तंत्र …












