“जिस तरह से कार्यपालिका अर्थ का बंटाधार कर रही है, मुझे लगता है इस लोकतंत्र को एक चौथे और मजबूत खंभे की जरूरत है, जो अर्थ का संचार न्याय-संगत कर सके। मैं पब्लिक पालिका की प्रस्तावना आपके सामने रखता हूँ।” – इसी आलेख से
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