इन दिनों : भींगे कंबल, बरसे पानी

“शिक्षा बीच बाजार में खड़ी है। हर स्तर की डिग्री का मोल भाव हो रहा है। यहाँ तक कि सरकारी विश्वविद्यालयों की हालत कम खराब नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सिर्फ नारों में सिमट गई है।” – इसी आलेख से