इन दिनों : लोकतंत्र की ऐसी-तैसी

“चुनाव में निष्पक्षता किताबों में पढ़िए और ख़ुश रहिए। मरती हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था का हम सब दिग्दर्शन करें।” – इसी आलेख से