इन दिनों : विचार सरहदों में नहीं बँधते

“जहाँ रचना है, वहाँ सीमाहीनता है। जहाँ कट्टरता है, वहाँ सीमाएँ-ही-सीमाएँ हैं।” – इसी आलेख से