इन दिनों : विष के दाँत तोड़ने ही होंगे

“हर देश को देखिए। उसने विष के दाँत विकसित किए हैं। अपनी आय या कर्जखोरी का बड़ा हिस्सा मारने के उपकरण पर खर्च कर रहे हैं।” – इसी आलेख से