लेखक को यह कहानी एक गीग वर्कर ने सुनाई थी। यह उसी का कथात्मक रूपांतरण है। उसकी आत्मकथा की वह व्यथा, जो सुनाते समय उसकी आँखों और चेहरे से झलकती थी, उसे शब्द नहीं पकड़ सकते है। कहानी थोड़ी लंबी है। समय हो तो अवश्य पढ़ें।
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