इन दिनों : हवा के नये झोंके से कुछ सवाल

“एक बार फिर फ़िज़ाओं में बदलाव की गंध है। वह किस रूप में व्यक्त होगा, कहा नहीं जा सकता, लेकिन लोगों को अपनी राय स्पष्ट रूप से रख देनी चाहिए।” – इसी आलेख से