इन दिनों : जाति संगठन और सामाजिक परिवर्तन का द्वंद्व

“हमें जाति विनाश के बारे में सोचना चाहिए, न कि उसकी जड़ में पानी और खाद देकर लहकाना चाहिए। लोकतंत्र लोगों का तंत्र है, वह जाति या संप्रदाय का तंत्र नहीं है।” – इसी आलेख से