इन दिनों : जाति संगठन और सामाजिक परिवर्तन का द्वंद्व

"हमें जाति विनाश के बारे में सोचना चाहिए, न कि उसकी जड़ में पानी और खाद देकर लहकाना चाहिए। लोकतंत्र लोगों का तंत्र है, वह जाति या संप्रदाय का तंत्र नहीं है।" - इसी आलेख से
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प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर

डॉ योगेन्द्र
डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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