कहानियाँ, साहित्यलैनी की आत्मकथा कहानी में कुछ ऐसा नहीं है, जो आकर्षित कर सके - न कथ्य, न शिल्प। लेकिन यह कुछ ऐसा है, जिसे बार-बार दुहराया गया है। इसीलिए बार-बार कहे जाने की जरूरत भी है। इसी जरूरत के कारण इसे फिर से कहा गया है। आप चाहें तो इसे फिर से पढ़ सकते हैं।Dr. Anil Kumar RoyNovember 22, 20257 Comments