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इन दिनों : जाति संगठन और सामाजिक परिवर्तन का द्वंद्व
“हमें जाति विनाश के बारे में सोचना चाहिए, न कि उसकी जड़ में पानी और खाद देकर लहकाना चाहिए। लोकतंत्र …
जो उचित लगे, वही करो!
“मोदी जी का सपना है कि 6G कि अगुवाई भारत करेगा। साथ ही 5G भारत में सबसे तेजी से फैल …
इन दिनों : महाभारत की पटकथा लिखी जा रही है
“महाभारत कथा में लिखा हुआ है कि जब द्रौपदी का चीरहरण होने लगा तो कर्ण ने द्रौपदी को वेश्या कहा, …
इन दिनों : वसंत की नवरचना और अमेरिकी डील
“आजकल ऐसा लगता है कि देश दिल्ली से नहीं वाशिंगटन से चलता है। अमेरिका यह कहे कि भारत को तेल …
इन दिनों : सरकार को डूबने के लिए चुल्लू भर पानी नहीं मिल रहा
“देश के वाणिज्य मंत्री से पूछा गया कि क्या भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, तब उनका जवाब था कि …
परीक्षा का पाप
“परीक्षा इतनी जरूरी हो गई है कि कुछ भी कर उसे जीतना है। युद्ध भी है, और प्यार भी — …
इन दिनों : शीर्ष पर बैठे घाघ लोग
“जब देश आजाद हुआ तो एक राष्ट्रीय सरकार बनी थी, जिसमें विरोधियों को भी जगह मिली थी। पचास-साठ वर्षों तक …
मनुष्य क्या है?
“वैज्ञानिकों ने हमें Homo Sapiens कहकर पुकारा, जहाँ Sapiens का शाब्दिक अर्थ बुद्धिमान होता है। उनके कथन का अर्थ है …
इन दिनों : जेफ्री एपस्टीन और मौजूदा विकास
“यह घटना मर्दवादी समाज की पोल खोलती ही है, साथ ही बताती है कि मनुष्य अभी तक निरा जानवर ही …
एक लेखक क्या चाहता है?
“लेखक अपनी बेटी को बताना चाहता है कि इस देश-समाज की उत्तराधिकारी तुम ही हो। पर इसके लिए तुम्हें नेता, …
इन दिनों : माननीयों के कुकर्म
“जिस मुख्यमंत्री को संविधान से प्यार नहीं है, उसे सम्मान नहीं देता, उस मुख्यमंत्री को कुर्सी पर क्यों रहना चाहिए? …
जो है, जरूरी है
‘जब मैं किताब हाथ में लेकर पढ़ा करता था, या किसी कॉपी पर अपनी कलम से लिख रहा होता था, …











