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इन दिनों : बाबू मोशाय, ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं
“प्रधानमंत्री का नौका विहार भी सुमित्रानंदन पंत का नौका विहार नहीं है। वे यहाँ भी वोट का व्यापार कर रहे …
इन दिनों : सत्ता की शाकाहारी मछलियाँ
“बंगाल में इन्होंने मछली खा ली तो वह मछली शाकाहारी हो गयी और जब ये अरुणाचल जायेंगे, जहाँ लोग कुत्ते …
इन दिनों : पीपल का साधु-भाव और गोबर-गौमूत्र के जलवे
“पीपर के नीचे हँसी- मजाक और कभी बोगिलबाजी। हम बच्चे बोगिल (धरती पर चौकोर खींचीं रेखाएँ) बनाकर गुल्लियाँ टनकारते। अब …
इन दिनों : और चाँद चू गया
“चाँद तो सूरज से रोशनी लेता है। आदमी भी एक-दूसरे से ज्ञान प्राप्त करता है। ज्ञान ही तो आदमी की …
भारतीय भाषाओं को कितना खतरा है?
“इस दस्तावेज़ में किया गया आकलन उन सभी भारतीय भाषाओं पर लागू होता है, जिनका प्रयोग राज भाषाओं के रूप …
इन दिनों : अजीब दास्ताँ है ये, कहाँ शुरू, कहाँ ख़त्म…
“यह सच है कि काल की चक्की चल रही है, एक दिन उस चक्की में पिसना ही है, मगर मनुष्य …
इन दिनों : छाती पीटने और हाय-हाय करने के चैम्पियन
“प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जानते थे कि जिस तरह की शर्तें वे महिला आरक्षण बिल में जोड़ रहे हैं, उन्हें विपक्ष …
इन दिनों : आँधी में भी गाँधी जी
“डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर सभा हो और गांधी का ज़िक्र न हो, यह असंभव है। पूना पैक्ट के …
इन दिनों : रोपे पेड़ बबूल के तो आम कहाँ से होय
“हर जाति ने अपने नायक ढूँढ लिया है। आज़ादी की लड़ाई में वैसे नायक ढूँढे जाते थे, जिन्होंने देश के …
इन दिनों : एक बार, जाल फेंक रे मछेरे
“हर क्षण हम थोड़ा-थोड़ा जीते और मरते जाते हैं। जो चीज़ें छूट जाती हैं, वे मर ही तो जाती हैं। …
इन दिनों : अगर मैं रुक गई अभी तो जा न पाऊँगी कभी….
आशा भोंसले ने फ़िल्म इंडस्ट्री में अस्सी वर्ष बिताए और बीस भाषाओं में बारह हज़ार से अधिक गीत गाये। वे …
इन दिनों : डॉ अम्बेडकर को याद करते हुए
“हिन्दू समाज का जो भयानक दुर्गुण है, वह जाति ही है। जाति को क़ायम रखते हुए कोई हिंदू अपनी श्रेष्ठता …












