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भारतीय भाषाओं को हाशिए पर क्यों और कैसे धकेला गया है?

“राष्ट्रों की भाषा छीनकर और सभी क्षेत्रों में एक अपारदर्शी एवं पराई भाषा थोपकर उन्हें नष्ट करना एक मानक औपनिवेशिक …
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grayscale photo of people walking on street

इन दिनों : अब तो इस तालाब का पानी बदल दो

“चुनाव में रोग लगा और अब यह कैंसर का रूप ले रहा है। इसका ठीक से इलाज नहीं हुआ तो …

इन दिनों : तन्वंगी गंगा और विस्थापन की त्रासदी

विस्थापन की त्रासदियों और पीड़ाओं को शब्दों में बाँधने की कोशिश करता साहित्यिक लेख …
a black and white photo of the word change

इन दिनों : नैतिकता और वर्जनाएँ

दरअसल संसार वह है जो ससर रहा है यानी बदल रहा है। इस बदलाव के झोंके में नैतिकता और वर्जनाओं …

निजी विद्यालय संचालन की चुनौतियाँ

केवल सरकारी स्कूल ही नहीं, निजी विद्यालयों की भी व्यथाएँ हैं। प्रस्तुत आलेख में निजी विद्यालयों के संचालन के मार्ग …
white and black plane in the air during daytime

ईरान–अमेरिका टकराव: लोकतंत्र का ढोंग या साम्राज्यवाद की भूख?

“जिस भूमंडलीकरण के दौर में हमें बताया गया था कि अब दुनिया “मुक्त बाजार” से चलेगी, विश्व में सह-अस्तित्व संभव …
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Four missiles on a launch platform with brick wall background

इन दिनों : आधुनिक सभ्यता का स्याह चेहरा

सभ्यता का तक़ाज़ा है कि लोग शांति और सुख की ओर बढ़ें। लेकिन विश्व में हड़पने की होड़ ने हत्याओं …

इन दिनों : आपदा में अवसर की ‘सुगंध’

“असल में लोकतंत्र पूँजीपतियों और उसके दलालों का शासन है। जनता को सरकार चुनने का भ्रम भले रहे, लेकिन असल …

बिहार में सत्ता-पलट से उपजी संभावनाएँ

व्यतीत का विश्लेषण राजनीतिक उठा-पटक और छल-छद्म को समझने में सहायक हो सकता है। परंतु वास्तविक चिंता राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक …
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a group of men standing around a wrecked airplane

इन दिनों : विश्व के हुक्मरानों से

“प्रकृति की किसी भी चीज़ को मनुष्य ने निर्मित नहीं किया, फिर इन पर मनुष्य का एकाधिकार क्यों हो? ये …

इन दिनों : कमाबे लंगोटिया, खाय लंब धोतिया

” राजनीतिक दलों के लिए खून-पसीना बहाते हैं उसके कार्यकर्ता, मगर कार्यकर्ताओं पर नेताओं को भरोसा नहीं होता, इसलिए गोदाम …

सिद्धांत और सत्ता के बीच फँसी नीतीश की राजनीति

“भारतीय राजनीति में आदर्श और व्यवहारिकता के बीच संघर्ष नया नहीं है। अनेक नेता सिद्धांतों की बात करते रहे हैं, …
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