लोकजीवन से जुड़ें
हमारे न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें और लोकजीवन से जुड़ी ताज़ा ख़बरें, कहानियाँ, और विचार सीधे अपने इनबॉक्स में प्राप्त करें।
शिक्षा : अधिकार से बाजार तक – नागरिक, कॉर्पोरेट और राज्य
शिक्षा, जो ऐतिहासिक रूप से सामाजिक पुनरुत्पादन और नागरिक चेतना के निर्माण का माध्यम रही है, नवउदारवादी पूँजीवाद के चरण …
इन दिनों : कहाँ आ गये हम, यों ही चलते-चलते
“मनुष्य में प्रकृति के दोनों गुण मौजूद हैं – सृजन भी और संहार भी। प्रकृति का अपना स्वभाव है। वह …
इन दिनों : एक अधूरी लड़ाई को अंजाम तक ले जाने की जरूरत
“बीजेपी जातिवादी और संप्रदायवादी पार्टी है। उसके जेहन और उसके समर्थक संगठनों में जातिवादी विषाणु है। वह अपने स्वार्थ के …
टैक्स पर टिप्पणी
“जब तक किसी को अशिक्षा, बीमारी, और युद्ध से मुनाफा होता रहेगा, कोई सुरक्षित नहीं रहेगा। सरकारों की पहली प्राथमिकता …
इन दिनों : वसंत के चपल-चरण और मान-अपमान कथा
“पिछले पाँच वर्षों में आईआईटी, आईआईएम तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व के उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग 100 छात्रों ने आत्महत्या …
इन दिनों : लोकतंत्र, नागरिक-बोध और हत्यारे
“सच बहुत कड़ुआ होता है, मगर एक समय ऐसा आता है कि बोलना पड़ता है। न चाहते हुए भी, लबों …
बेरोजगारी हटाओ!
“हम एक आर्थिक इकाई का गठन करते हैं। मान लीजिए हम उसे नाम देते हैं — आदर्शपुर पब्लिक पालिका।——- इस …
समुद्र, चांद और सूरज का लाल गोला
“समुद्र पर काला अंधेरा फैला है, हहराती लहरें हैं। सिर्फ समुद्र की लहरों के सफेद झाग दिखाई पड़ते हैं। निरंतर …
पोल्युशन का सलूशन
“अस्तित्वगत त्रयों की जरूरतें व्यक्ति और समाज के संबंध को आकार देती हैं। शरीर को कसरत चाहिए, चेतना को ज्ञान, …
इन दिनों : सागर होता आदमी
“मनुष्य में संभावनाएँ बहुत हैं। वह बहुत तरल होता है। उसमें संवेदनाएं बहती रहती हैं, इसलिए उसमें बदलाव की अपार …
मैं रिपब्लिक हूँ
“गणतंत्र वह व्यवस्था है, जिसमें सत्ता किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि जनता की सामूहिक चेतना और सहमति की होती है। …
इन दिनों : चिंता और चिंतन
“चिंता होती है, तभी चिंतन होता है। चिंता तात्कालिक स्थितियों से जुड़ी होती है और चिंतन चिंता की एक समझ …











