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लोकतंत्र की सत्ता का सपना, अपना होना चाहिए!
“एक तरह से देखा जाए तो जब सरकार पब्लिक द्वारा दिए गए टैक्स के पैसे का सदुपयोग करने में असफल …
इन दिनों : राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के संघर्ष में हारता एक देश
“यह देश तय करे कि उसे प्रधानमंत्री की प्रशंसा चाहिए या देश की तबाही? हम आखिर कहाँ आ गये हैं? …
इन दिनों : जिजीविषा और लोकतंत्र के चीथड़े
“राजभवन को लोकभवन बना दिया गया, मगर उसकी कार्यशैली में क्या अंतर आया? अंग्रेजों के ये लाट साहब आजादी के …
शिक्षा क्रांति की जरूरत
“जब तक किसी की अशिक्षा और बीमारी से मुनाफा होता रहेगा, ना ही कोई शिक्षित होगा, ना ही स्वस्थ। आज …
इन दिनों : गलगोटिया की अपसंस्कृति अचानक नहीं आयी
“जो भी हो, गलगोटिया कोई एक दिन में पैदा नहीं होता। उसकी भी लंबी परंपरा है। झूठ का जो टोकरा …
इन दिनों : भींगे कंबल, बरसे पानी
“शिक्षा बीच बाजार में खड़ी है। हर स्तर की डिग्री का मोल भाव हो रहा है। यहाँ तक कि सरकारी …
इन दिनों : मनुष्य क्या पिंजरबद्ध दुनिया स्वीकार करेगा?
“क्या हम श्रम विहीन दुनिया में प्रवेश करने जा रहे हैं? अभी तक की मनुष्य की संस्कृति श्रम आधारित है। …
इन दिनों : वैलेंटाइन और शिव
“प्रेम की गति अजीब होती है। बात बात में ‘आई लव यू’ कहने वाला संभव है कोई लव नहीं करे …
इन दिनों : लोकतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवहार
“पक्ष और विपक्ष में परस्पर विश्वास न हो, तो लोकतांत्रिक व्यवहार का क्षरण होता है। प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता …
इन दिनों : अनजान क्षितिज पर मिलता नहीं सहारा
“कार्नेलिया दूसरे देश की है, मगर भारतवर्ष के सौंदर्य और स्वभाव पर मुग्ध है। मगर आज क्या हो रहा है। …
तू ज़िंदा है
“विपक्ष बस सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। सदन का तो पता नहीं, पर इतना सुनकर मुझे …
इन दिनों : पप्पू से राउडी
“बीजेपी ने जिसे ‘पप्पू’ कह कर नीचा दिखाना चाहा, वह ‘राउडी’ कैसे हो गया? …… बीजेपी ने इतना नोंचा-खसोटा, लोकतंत्र …











