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इन दिनों : लोकतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवहार
“पक्ष और विपक्ष में परस्पर विश्वास न हो, तो लोकतांत्रिक व्यवहार का क्षरण होता है। प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता …
इन दिनों : अनजान क्षितिज पर मिलता नहीं सहारा
“कार्नेलिया दूसरे देश की है, मगर भारतवर्ष के सौंदर्य और स्वभाव पर मुग्ध है। मगर आज क्या हो रहा है। …
तू ज़िंदा है
“विपक्ष बस सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। सदन का तो पता नहीं, पर इतना सुनकर मुझे …
इन दिनों : पप्पू से राउडी
“बीजेपी ने जिसे ‘पप्पू’ कह कर नीचा दिखाना चाहा, वह ‘राउडी’ कैसे हो गया? …… बीजेपी ने इतना नोंचा-खसोटा, लोकतंत्र …
इन दिनों : जाति संगठन और सामाजिक परिवर्तन का द्वंद्व
“हमें जाति विनाश के बारे में सोचना चाहिए, न कि उसकी जड़ में पानी और खाद देकर लहकाना चाहिए। लोकतंत्र …
जो उचित लगे, वही करो!
“मोदी जी का सपना है कि 6G कि अगुवाई भारत करेगा। साथ ही 5G भारत में सबसे तेजी से फैल …
इन दिनों : महाभारत की पटकथा लिखी जा रही है
“महाभारत कथा में लिखा हुआ है कि जब द्रौपदी का चीरहरण होने लगा तो कर्ण ने द्रौपदी को वेश्या कहा, …
इन दिनों : वसंत की नवरचना और अमेरिकी डील
“आजकल ऐसा लगता है कि देश दिल्ली से नहीं वाशिंगटन से चलता है। अमेरिका यह कहे कि भारत को तेल …
इन दिनों : सरकार को डूबने के लिए चुल्लू भर पानी नहीं मिल रहा
“देश के वाणिज्य मंत्री से पूछा गया कि क्या भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, तब उनका जवाब था कि …
परीक्षा का पाप
“परीक्षा इतनी जरूरी हो गई है कि कुछ भी कर उसे जीतना है। युद्ध भी है, और प्यार भी — …
इन दिनों : शीर्ष पर बैठे घाघ लोग
“जब देश आजाद हुआ तो एक राष्ट्रीय सरकार बनी थी, जिसमें विरोधियों को भी जगह मिली थी। पचास-साठ वर्षों तक …
मनुष्य क्या है?
“वैज्ञानिकों ने हमें Homo Sapiens कहकर पुकारा, जहाँ Sapiens का शाब्दिक अर्थ बुद्धिमान होता है। उनके कथन का अर्थ है …











