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संविधान से समाधान तक
“चाहे लिखित हो या नहीं, हर देश काल में हर समाज के पास एक संविधान रहा है। संविधान ऐसे नियम-क़ानूनों …
इन दिनों : वैश्विक कोतवाली के कोतवाल
“किसी की धरती को पिता और किसी की धरती को माँ कहने में कौन सी बुद्धिमानी है? विदेश नीति इससे …
इन दिनों : शर्म पर गर्व और गर्व पर शर्म का अमृत काल
“देश में सत्ता की ओर से फैलाई जा रही नफ़रत और हिंसा के शिकार कौन होगा, कहा नहीं जा सकता। …
इन दिनों : गलगोटिया-चेतना के उत्तराधिकारी
“उम्मीद है कि सरकारी विश्वविद्यालयों को अपदस्थ कर जल्द ही गलगोटिया विश्वविद्यालय हमारे सिर पर नाचेगा और हमें अपार प्रसन्नता …
इन दिनों : बच्चों की दुनिया में सेंध
“देश के सिस्टम में भी अंग्रेजी का बोलबाला है और बिहार के बच्चों को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति बेवकूफ बना …
इन दिनों : लालटेन युग का सुख और रोबोटिक युग का दुःख
“यह सब जानकर आपको लग रहा होगा कि उन दिनों बहुत पिछड़ा समाज था। हाँ, उन दिनों सामान कम था, …
इहलोकतंत्र क्या है?
““स्वराज” एक राजनैतिक अवस्था ही नहीं है, यह एक दार्शनिक चित्रण है जो हमारे चरित्र में प्रतिबिंबित होना चाहिए। स्वराज …
इन दिनों : बुढ़ापा और जवानी: सौंदर्य और उदासी
“विरह और मिलन का क्रम ही तो जीवन है। कहाँ होता है विरह और मिलन? एक स्थल पर निर्धारित है …
इन दिनों : जाति के दड़वों की घुटन
“जाति एक दड़वा बनाती है, जिसमें इंसान घुटता रहता है। जाति के हजारों दड़वे हैं और उन दड़वों में इंसान …
लोकतंत्र की सत्ता का सपना, अपना होना चाहिए!
“एक तरह से देखा जाए तो जब सरकार पब्लिक द्वारा दिए गए टैक्स के पैसे का सदुपयोग करने में असफल …
इन दिनों : राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के संघर्ष में हारता एक देश
“यह देश तय करे कि उसे प्रधानमंत्री की प्रशंसा चाहिए या देश की तबाही? हम आखिर कहाँ आ गये हैं? …
इन दिनों : जिजीविषा और लोकतंत्र के चीथड़े
“राजभवन को लोकभवन बना दिया गया, मगर उसकी कार्यशैली में क्या अंतर आया? अंग्रेजों के ये लाट साहब आजादी के …












