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Man in blue shirt casting fishing net into vibrant ocean waves, showcasing traditional fishing techniques.

इन दिनों : एक बार, जाल फेंक रे मछेरे

“हर क्षण हम थोड़ा-थोड़ा जीते और मरते जाते हैं। जो चीज़ें छूट जाती हैं, वे मर ही तो जाती हैं। …

इन दिनों : अगर मैं रुक गई अभी तो जा न पाऊँगी कभी….

आशा भोंसले ने फ़िल्म इंडस्ट्री में अस्सी वर्ष बिताए और बीस भाषाओं में बारह हज़ार से अधिक गीत गाये। वे …

इन दिनों : डॉ अम्बेडकर को याद करते हुए

“हिन्दू समाज का जो भयानक दुर्गुण है, वह जाति ही है। जाति को क़ायम रखते हुए कोई हिंदू अपनी श्रेष्ठता …
एआई द्वारा निर्मित प्रतीकात्मक चित्र

इन दिनों : संवैधानिक मताधिकार और चुनाव आयोग के ठहाके

“आज़ादी मिली तो भारतीयों को वयस्क मताधिकार मिला। संविधान ने गारंटी दी कि हर भारतीय को वोट देने का अधिकार …
A tranquil Buddha statue surrounded by lush greenery and vibrant plants in a serene garden.

इन दिनों : अनासक्ति और कामना 

“संसार से मुक्त होने की कामना भी क्या एक कामना नहीं है? मनुष्य भावनाओं और विचारों की दुनिया में छटपटाता …
a close up of a typewriter with a paper on it

इन दिनों : जाति-श्रेष्ठता और राष्ट्र की छाती से बहते लहू

“हम एक अँधेरी गुफा में धँसते जा रहे हैं, जहाँ अपनी मौत का ही उत्सव मनाने की तैयारी कर रहे …

शिक्षा नीति 2020 और सामाजिक विभेद

नीति राजसत्ता की वह परिकल्पना होती है, जो यह दिखाती है कि व्यवस्था को किन रास्तों से होकर कहाँ तक …
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इन दिनों : युद्ध के ख़िलाफ़ वायलिन और शहनाई

“युद्ध अगर बदतमीजों के हथियार हैं तो गुनगुनाना इंसानों के। सभ्यताएँ गुनगुनाने से समृद्ध होंगी।” – इसी आलेख से …
grayscale photo of people walking on street

इन दिनों : लोकतंत्र की ऐसी-तैसी

“चुनाव में निष्पक्षता किताबों में पढ़िए और ख़ुश रहिए। मरती हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था का हम सब दिग्दर्शन करें।” – इसी …

इन दिनों : विचारों का षड्यंत्र

फर्जी इतिहास-बोध न केवल अपनी विरासत को नकारता है, बल्कि अपने अस्तित्व को भी नकारता है। कैसे? पढ़ें यह लेख। …
Casual gathering of friends enjoying beer and conversation at a rooftop bar.

इन दिनों : तुलसी इस संसार में भाँति-भाँति के लोग

हमारी संस्कृति में नशापान अनन्य रूप से शामिल है। देवी-देवता नशापान करते हैं और धार्मिक आयोजनों में शराब और भाँग-धतूरे …

यह सीपीआई का नहीं, देश के शहीदों का अपमान है

आजादी के संघर्ष में “भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी केवल एक संगठन नहीं थी, बल्कि वह उस चेतना का नाम थी, जिसने …
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