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people gathering on a concert

इन दिनों : होली के रंग और ज्ञान के संग

“इधर के दिनों में सभी हिन्दू पर्वों की व्याख्या हो रही है। होली की भी। हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद की कथा …
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इन दिनों : एक अनाड़ी की क्रिकेट-टिप्पणी

विश्व कप में “मौजूदा टीम सेमीफाइनल में पहुँच गयी है, लेकिन यह टीम बेहतर क्रिकेट नहीं खेल रही है। कैच …
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इन दिनों : लोकतंत्र और निरंकुश सत्ता

“हर तानाशाह के कुछ चमकते नारे होते हैं, जिसमें जनता उलझ-पुलझ कर रहे जाती है। जनता नारों का गुलाम बन …

इन दिनों : राजनीति के दो छद्म चेहरे

“अरविंद केजरीवाल आज आज कैमरे के सामने रो रहे हैं। कैमरे के सामने रोने में नरेंद्र मोदी जी भी अव्वल …

संविधान से समाधान तक

“चाहे लिखित हो या नहीं, हर देश काल में हर समाज के पास एक संविधान रहा है। संविधान ऐसे नियम-क़ानूनों …

इन दिनों : वैश्विक कोतवाली के कोतवाल

“किसी की धरती को पिता और किसी की धरती को माँ कहने में कौन सी बुद्धिमानी है? विदेश नीति इससे …

इन दिनों : शर्म पर गर्व और गर्व पर शर्म का अमृत काल

“देश में सत्ता की ओर से फैलाई जा रही नफ़रत और हिंसा के शिकार कौन होगा, कहा नहीं जा सकता। …

इन दिनों : गलगोटिया-चेतना के उत्तराधिकारी

“उम्मीद है कि सरकारी विश्वविद्यालयों को अपदस्थ कर जल्द ही गलगोटिया विश्वविद्यालय हमारे सिर पर नाचेगा और हमें अपार प्रसन्नता …

इन दिनों : बच्चों की दुनिया में सेंध

“देश के सिस्टम में भी अंग्रेजी का बोलबाला है और बिहार के बच्चों को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति बेवकूफ बना …

इन दिनों : लालटेन युग का सुख और रोबोटिक युग का दुःख

“यह सब जानकर आपको लग रहा होगा कि उन दिनों बहुत पिछड़ा समाज था। हाँ, उन दिनों सामान कम था, …

इहलोकतंत्र क्या है?

““स्वराज” एक राजनैतिक अवस्था ही नहीं है, यह एक दार्शनिक चित्रण है जो हमारे चरित्र में प्रतिबिंबित होना चाहिए। स्वराज …

इन दिनों : बुढ़ापा और जवानी: सौंदर्य और उदासी

“विरह और मिलन का क्रम ही तो जीवन है। कहाँ होता है विरह और मिलन? एक स्थल पर निर्धारित है …