लोकजीवन से जुड़ें
हमारे न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें और लोकजीवन से जुड़ी ताज़ा ख़बरें, कहानियाँ, और विचार सीधे अपने इनबॉक्स में प्राप्त करें।
इन दिनों : युद्ध के ख़िलाफ़ वायलिन और शहनाई
“युद्ध अगर बदतमीजों के हथियार हैं तो गुनगुनाना इंसानों के। सभ्यताएँ गुनगुनाने से समृद्ध होंगी।” – इसी आलेख से …
इन दिनों : लोकतंत्र की ऐसी-तैसी
“चुनाव में निष्पक्षता किताबों में पढ़िए और ख़ुश रहिए। मरती हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था का हम सब दिग्दर्शन करें।” – इसी …
इन दिनों : विचारों का षड्यंत्र
फर्जी इतिहास-बोध न केवल अपनी विरासत को नकारता है, बल्कि अपने अस्तित्व को भी नकारता है। कैसे? पढ़ें यह लेख। …
इन दिनों : तुलसी इस संसार में भाँति-भाँति के लोग
हमारी संस्कृति में नशापान अनन्य रूप से शामिल है। देवी-देवता नशापान करते हैं और धार्मिक आयोजनों में शराब और भाँग-धतूरे …
यह सीपीआई का नहीं, देश के शहीदों का अपमान है
आजादी के संघर्ष में “भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी केवल एक संगठन नहीं थी, बल्कि वह उस चेतना का नाम थी, जिसने …
इन दिनों : डकैती भी जहाँ प्यारी लगे
“विष से भरे बाण कलेजे में चुभोए जा रहे हैं और जिसे चुभाया जा रहा है, वह उसे अमृत मान …
इन दिनों : वक़्त का परिंदा रुका है कहाँ!
“वतन के वास्ते मिट गए बिस्मिल जैसे हज़ारों लोग और अब के सत्ताधारी स्वार्थ के वास्ते वतन को ही चींथ …
इन दिनों : संस्कृतिहीनता के युग में
“वे खूब ज्ञान परंपरा की तलाश करें, लेकिन वे बतायें कि वे ज्ञान परंपराएँ इतनी निर्बल क्यों थीं कि भारतीय …
शिक्षा, भाषा और समानता का सवाल
शिक्षा-सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय व्यवहार के आधारों पर अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को अच्छे स्कूल नहीं कहा जा सकता। कैसे? तथ्यों और …
इन दिनों : मुझे रहजनों से गिला नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है
“अड़ानी एनटीपीसी स्थल में ज्योंही हमलोगों ने प्रवेश किया, पहाड़िया जाति के बीसों स्त्री-पुरुष आ गए। ये लोग हताश-निराश हैं। …
इन दिनों : सच्चे बच्चों की चेतना में भूकंप
“बच्चों को किताबों और नेट में झोंक दीजिए, फिर तो यंत्र ही बनेंगे और नहीं बन सके तो किसी कुकांड …
इन दिनों : अँधेरे में लिपटता सत्य
सोशल मीडिया पर या तो आप एआई की गिरफ्त में हैं या नफ़रत की या विज्ञापनों की। बहुत कम पोस्ट …












