कार्यकर्ता और लेखक
डॉ. अनिल कुमार रॉय सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के लिए अथक संघर्षरत हैं। उनके लेखन में हाशिए पर पड़े लोगों के संघर्ष और एक न्यायसंगत समाज की आकांक्षा की गहरी प्रतिबद्धता परिलक्षित होती है।
डॉ. अनिल कुमार रॉय सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के लिए अथक संघर्षरत हैं। उनके लेखन में हाशिए पर पड़े लोगों के संघर्ष और एक न्यायसंगत समाज की आकांक्षा की गहरी प्रतिबद्धता परिलक्षित होती है।
सामाजिक न्याय के अस्पताल में शिक्षा की शव-परीक्षा

उच्च शिक्षा के ताबूत में एक और कील

मुश्किल है हम उस दौर में जी रहे हैं, जिसके सामने से शिक्षा की शवयात्रा निकल रही है, लेकिन हमारी आँखें इसलिए नम नहीं हो रही हैं, क्योंकि हमें समझाया गया है कि शिक्षा कब्र में नहीं, स्वर्ग में जा रही है.
दंगों की राजनीतिक आर्थिकी
बताना मना है

सरकारी आदेश के बाद कॉलेज में शुरू हुई बैठकों, बढ़ते नामांकन की होड़, और एक अवैतनिक प्राध्यापक की संघर्षमय ज़िंदगी—यह कहानी शिक्षा, राजनीति और जीविका की कड़वी सच्चाइयों को बड़े सजीव ढंग से उजागर करती है।

