
"भारतीय इतिहास का सबसे सुंदर यथार्थ यह है कि चरखा और बंदूक परस्पर विरोधी होने के बावजूद एक अनकहे ऐतिहासिक द्वंद्वात्मक रिश्ते में बँधे थे।" - इसी आलेख से

"कूटनीति लंबे समय तक सरकारों, राजधानियों और राजनयिकों के बीच होने वाली बातचीत तक सीमित समझी जाती रही। आज उसकी सीमाएँ काफी विस्तृत हो चुकी हैं। विश्वविद्यालय, शोध संस्थान, सांस्कृतिक संगठन, विद्यार्थी, वैज्ञानिक, कलाकार और युवा स्वयं अंतरराष्ट्रीय संबंधों के महत्वपूर्ण वाहक बन रहे हैं।" - इसी आलेख से

"राज्य को शिक्षक से एक वैचारिक कार्य — सहमति, अनुशासन और सामाजिक व्यवस्था की वैधता का निर्माण— चाहिए। परंतु वह उसे उसी बिना उत्पादक योगदान के आर्थिक लाभ निचोरने वाले नौकरशाही ढाँचे के अधीन रखता है, जो अर्थव्यवस्था के अन्य निम्न-वेतन संविदा श्रम को नियंत्रित करता है।" - इसी आलेख से

"एक शोधार्थी के रूप में जब मैं पिछले वर्षों की हिमालयी घटनाओं, वैज्ञानिक अध्ययनों और वर्तमान नेपाल त्रासदी को एक साथ रखकर देखता हूँ तो मुझे सबसे बड़ी कमी संसाधनों की नहीं, बल्कि हमारी सोच में दिखाई देती है। हम अभी भी आपदा को एक घटना मानते हैं, जबकि बदलती जलवायु के दौर में आपदा एक लगातार बढ़ता हुआ जोखिम है।" - इसी आलेख से

"जाति की सड़ांध हिन्दू समाज का पीछा नहीं छोड़ रही। हम कितने ही जाति के बारे में प्रचार करें कि जाति नहीं बची, लेकिन सच यह है कि जाति हिन्दुओं की नस-नस में है।" - इसी आलेख से।

"निम्न और मध्यम आय वाले देशों में 37% बच्चों को दूसरी भाषा में पढ़ाया जाता है, जिससे उन्हें स्कूल काल के दौरान हर समय नुकसान होता है और उनकी सीखने की क्षमता सीमित हो जाती है।" - इसी आलेख से

यह आलेख पॉलो फ्रेरे के शिक्षा-सिद्धांत का छठा और अंतिम भाग है। इस भाग में गांधी, अम्बेडकर और फ्रेरे के शिक्षा-सिद्धांतों की समीक्षा की गयी है। आलेख में तीनों की पृष्ठभूमि और दिशा की भिन्नता के बावजूद साझा बिंदु की पड़ताल की गयी है और उनकी तुलना भी।

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को अक्सर जीत और हार के साँचे में विवेचित किया जाता है। जीत-हार की बहस से अलग इस आलेख में देश की राजनीति और नागरिक समाज पर इस आंदोलन के पड़ने वाले प्रभाव को विवेचित किया गया है।

यह आलेख 'उत्पीड़ितों का शिक्षाशास्त्र' के विश्लेषण का पाँचवाँ भाग है। इस भाग में बताया गया है कि प्रभुत्वशाली वर्ग अपने प्रभुत्व को कायम रखने के लिए किन युक्तियों का इस्तेमाल करता है और उत्पीड़ित वर्ग को अपनी मुक्ति के लिए किन उपायों का उपयोग करना चाहिए। अगले अंक में पढ़ें अंबेडकर, गांधी और पॉलो फ्रेरे के शिक्षा-दर्शन की तुलनात्मक विवेचना।

ब्राज़ील में अनपढ़ों को वोट देने का अधिकार नहीं था। इस तरह आधी से अधिक आबादी राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर थी। उन अनपढ़ मजदूरों को पढ़ाने के लिए पॉलो फ्रेरे ने शिक्षा प्रदान करने का जो ऐतिहासिक प्रयोग किया, उसने न केवल उन मज़दूरों के जीवन को बदला, बल्कि राजनीतिक व्यवस्था का भी संतुलन बदल दिया।