Category इहलोकतंत्र

नया कुरुक्षेत्र

"विक्रमशिला हो, या तक्षशिला, उस समय के अनुसार उत्तम शिक्षा दे रही थे। धर्म, दर्शन, कला, संस्कृति फल-फूल रही थी। इसलिए नहीं कि किसी देवी-देवता का वरदान था। हम ही थे जो मंदिर को सुंदर बना रहे थे। कला समृद्ध हो रही थी। संगीत की शाला थे मंदिर, मधुर भजन मन को शांत करती थी।" इसी आलेख से

मुझे तो इहलोकतंत्र चाहिए!

a large crowd of people standing in a street
"क्या है इहलोकतंत्र? मैंने पाया यह दुनिया मेरी है। मैं इसे लिख रहा हूँ, ना सिर्फ़ शब्दों में, बल्कि अपने कर्मों से। मैंने अपने कर्म लिख डाले।" - इसी आलेख से

आप क्या चाहते हैं?

"जीवन अर्थवान है। इस अर्थ के वितरण की एक परिकल्पना है, पब्लिक पालिका। इस लोकतंत्र को एक चौथा मजबूत खंभा चाहिए, वह खंभा आर्थिक हो सकता है। पत्रकारिता तो दर्शक मात्र है। कहीं से सुनकर ख़बरें सुनाती है। आर्थिक अगर कोई खंभा होता तो सोचिए!" - इसी आलेख से।

नहीं मत मारो

woman reading books
"हम मूर्ख हैं, या बनाये जा रहे हैं? अब तो समझ भी नहीं आता। कॉलेज के खुलने नहीं, बंद हो जाने के ढोल पीटे जा रहे हैं, क्योंकि अधर्मियों का दाखिला हो गया था। लगता तो है, हम मूर्ख हैं भी, और बनाये भी जा रहे हैं।" - इसी आलेख से

कहानी नहीं बदलती

"मेरा सपना सरल है, सीधा है। सपना वही है, जो बापू ने दिखाया था। ग्राम स्वराज का सपना। उनकी सिर्फ़ इच्छा ही नहीं थी, उनके पास प्लान भी था। ....... उन्होंने विस्तार से अपना दर्शन समझाया भी है।" - इसी आलेख से

हर कोई शास्त्री

"हम सबको मिलकर शिक्षा के बारे में सोचना ही होगा। एक ऐसी शिक्षा, जो जानवरों को ऐसा इंसान बना सके, जिसे जानवरों से भी सहानुभूति हो। यहाँ तो जानवरों के नाम पर भी भ्रष्टाचार चल रहा है, और नारे लग रहे हैं कि धर्म ख़तरे में है। होगा ही। जहाँ जीवन ख़तरे में हो, वहाँ धर्म पर दुधारी तलवार तो लटकती ही रहेगी।" - इसी आलेख से

सही सवाल

"हमारी समस्या ही यही है कि हम जवाब तलाश रहे हैं। और हमें सवाल ही पता नहीं होता। सही सवाल पूछेंगे, तभी तो सही जवाब तक पहुँचने की जिज्ञासा जागेगी।" - इसी आलेख से