
यह कहानी एक ऐसी लड़की की कहानी है, जो सामाजिक रूढ़ियों के कारण कम उम्र में ब्याह दी जाती है। उसके जीवन में की राह में विषम परिस्थितियाँ काँटों की तरह बिछ जाती है। फिर भी वह हार नहीं मानती और सारी बाधाओं को चीरकर अपना मुकाम बनाती है।

"प्राकृतिक संतुलन का तात्पर्य उस सामंजस्य से है, जिसमें सभी जैविक और अजैविक घटक एक-दूसरे के साथ संतुलित रूप से क्रियाशील रहते हैं। जब यह संतुलन बना रहता है, तब पृथ्वी पर जीवन सुचारु रूप से चलता है। किंतु ...." - इसी आलेख से

केवल सरकारी स्कूल ही नहीं, निजी विद्यालयों की भी व्यथाएँ हैं। प्रस्तुत आलेख में निजी विद्यालयों के संचालन के मार्ग में विभिन्न प्रकार की संरचनात्मक, आर्थिक और प्रशासनिक कठिनाइयों का विश्लेषण है।