
"चाहे लिखित हो या नहीं, हर देश काल में हर समाज के पास एक संविधान रहा है। संविधान ऐसे नियम-क़ानूनों का दस्तावेज है, जो उस समाज की राजनीति की हदों को निर्धारित करती है।" इसी आलेख से

"“स्वराज” एक राजनैतिक अवस्था ही नहीं है, यह एक दार्शनिक चित्रण है जो हमारे चरित्र में प्रतिबिंबित होना चाहिए। स्वराज सिर्फ एक विचार ही नहीं, व्यवहार है।" - इसी आलेख से

"एक तरह से देखा जाए तो जब सरकार पब्लिक द्वारा दिए गए टैक्स के पैसे का सदुपयोग करने में असफल हो जाती है, तब उसे सत्ता में बने रहने के लिए दंडनीति का प्रयोग करना पड़ता है। साम-दाम-दंड-भेद सब जायज लगने लगता है।" इसी आलेख से

"जब तक किसी की अशिक्षा और बीमारी से मुनाफा होता रहेगा, ना ही कोई शिक्षित होगा, ना ही स्वस्थ। आज एक समाज बीमार पड़ा है। इसकी समस्या सिर्फ सत्ता नहीं है, सिस्टम है।" - इसी आलेख से

"विपक्ष बस सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। सदन का तो पता नहीं, पर इतना सुनकर मुझे तो यकीन हो गया मुझे ज़रूर गुमराह किया जा रहा। पक्ष हो, या विपक्ष, सरकार किसी की भी हो, होती तो जनता के लिए ही है।" इसी आलेख से

"मोदी जी का सपना है कि 6G कि अगुवाई भारत करेगा। साथ ही 5G भारत में सबसे तेजी से फैल रहा है। सरकार क्या यह अपनी उपलब्धि बता रही है? पूरा का पूरा टेलीकॉम सेक्टर निजी हाथों में है।" - इसी आलेख से

"परीक्षा इतनी जरूरी हो गई है कि कुछ भी कर उसे जीतना है। युद्ध भी है, और प्यार भी — यहाँ सबने सब कुछ जायज़ मान लिया है। साम-दाम-दंड-भेद किसी भी तरह बस परीक्षा निकालनी है।" - इसी आलेख से

"वैज्ञानिकों ने हमें Homo Sapiens कहकर पुकारा, जहाँ Sapiens का शाब्दिक अर्थ बुद्धिमान होता है। उनके कथन का अर्थ है कि मनुष्य एक बुद्धिमान प्राणी है। ....." - इसी आलेख से

"लेखक अपनी बेटी को बताना चाहता है कि इस देश-समाज की उत्तराधिकारी तुम ही हो। पर इसके लिए तुम्हें नेता, अधिकारी बनने की जरूरत है। इस देश का हर नागरिक इस देश का अधिनायक है।" - इसी आलेख से

'जब मैं किताब हाथ में लेकर पढ़ा करता था, या किसी कॉपी पर अपनी कलम से लिख रहा होता था, तब सिर्फ़ मेरी वैचारिक स्मृति ही नहीं, Image Memory भी बन रही होती थी। ....." इसी आलेख से