इन दिनों : गलगोटिया-चेतना के उत्तराधिकारी
“उम्मीद है कि सरकारी विश्वविद्यालयों को अपदस्थ कर जल्द ही गलगोटिया विश्वविद्यालय हमारे सिर पर नाचेगा और हमें अपार प्रसन्नता …
इन दिनों : बच्चों की दुनिया में सेंध
“देश के सिस्टम में भी अंग्रेजी का बोलबाला है और बिहार के बच्चों को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति बेवकूफ बना …
इन दिनों : लालटेन युग का सुख और रोबोटिक युग का दुःख
“यह सब जानकर आपको लग रहा होगा कि उन दिनों बहुत पिछड़ा समाज था। हाँ, उन दिनों सामान कम था, …
इहलोकतंत्र क्या है?
““स्वराज” एक राजनैतिक अवस्था ही नहीं है, यह एक दार्शनिक चित्रण है जो हमारे चरित्र में प्रतिबिंबित होना चाहिए। स्वराज …
इन दिनों : बुढ़ापा और जवानी: सौंदर्य और उदासी
“विरह और मिलन का क्रम ही तो जीवन है। कहाँ होता है विरह और मिलन? एक स्थल पर निर्धारित है …
इन दिनों : जाति के दड़वों की घुटन
“जाति एक दड़वा बनाती है, जिसमें इंसान घुटता रहता है। जाति के हजारों दड़वे हैं और उन दड़वों में इंसान …
लोकतंत्र की सत्ता का सपना, अपना होना चाहिए!
“एक तरह से देखा जाए तो जब सरकार पब्लिक द्वारा दिए गए टैक्स के पैसे का सदुपयोग करने में असफल …
इन दिनों : राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के संघर्ष में हारता एक देश
“यह देश तय करे कि उसे प्रधानमंत्री की प्रशंसा चाहिए या देश की तबाही? हम आखिर कहाँ आ गये हैं? …
इन दिनों : जिजीविषा और लोकतंत्र के चीथड़े
“राजभवन को लोकभवन बना दिया गया, मगर उसकी कार्यशैली में क्या अंतर आया? अंग्रेजों के ये लाट साहब आजादी के …
शिक्षा क्रांति की जरूरत
“जब तक किसी की अशिक्षा और बीमारी से मुनाफा होता रहेगा, ना ही कोई शिक्षित होगा, ना ही स्वस्थ। आज …
इन दिनों : गलगोटिया की अपसंस्कृति अचानक नहीं आयी
“जो भी हो, गलगोटिया कोई एक दिन में पैदा नहीं होता। उसकी भी लंबी परंपरा है। झूठ का जो टोकरा …
इन दिनों : भींगे कंबल, बरसे पानी
“शिक्षा बीच बाजार में खड़ी है। हर स्तर की डिग्री का मोल भाव हो रहा है। यहाँ तक कि सरकारी …












