डॉ योगेन्द्र

डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग


पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

इन दिनों : ज़िंदगी ज़िंदादिली का नाम है 

Close-up of ripe mangoes hanging on a branch surrounded by lush green leaves.
"इस बार मैंने बगीचे को क़रीब से देखा- मंजर लगने से फल टूटने तक। बीच में आँधी आयी। लाखों अमौरियॉं झडीं। बहुत कुछ हुआ।" - इसी आलेख से

इन दिनों : वैचारिक उदात्तता और संकीर्णता

a large building with a clock tower on top of it
"अंदर गया तो एक शिक्षिका अकेली अपने कमरे में बैठी थी। मुझे देखते ही खड़ी हो गई। प्रणाम किया और हाल-चाल पूछा। मैंने उनसे पूछा कि कक्षाएँ ख़ाली क्यों हैं? तो उन्होंने जवाब दिया कि दोनों सत्र के छात्र सेंट अप हो चुके हैं। ...." इसी आलेख से

इन दिनों : युवाओं का प्रदर्शन: साज़िश, संदेह और उम्मीदें

"ये लोग हिंदू-मुसलमान, पाकिस्तान, देशद्रोही जैसे शब्दों से शुरू होते हैं और वहीं ख़त्म।" - इसी आलेख से

इन दिनों : हवा के नये झोंके से कुछ सवाल

gray printing paper on white surface
"एक बार फिर फ़िज़ाओं में बदलाव की गंध है। वह किस रूप में व्यक्त होगा, कहा नहीं जा सकता, लेकिन लोगों को अपनी राय स्पष्ट रूप से रख देनी चाहिए।" - इसी आलेख से

इन दिनों : वक्त का तराना

"आज़ादी इसलिए नहीं मिली थी कि जिनके पूर्वजों ने ख़ून बहाया, उनकी नागरिकता पर ही सवाल उठने लगे। उन्हें 'परजीवी' और 'कॉकरोच' कहा जाने लगे। ऐसे ही वक़्त में रणभेरी बजती है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : बदजुबानी की राजनीतिक संस्कृति

"नेताओं की बदज़ुबानी के पीछे कुशिक्षा ही है। पहले के नेताओं की औपचारिक शिक्षा बहुत नहीं भी होती थी तो भी किताबें पढ़ते थे और बौद्धिक जनों से जीवंत रिश्ता बनाए रखते थे। आजकल के नेताओं की तरक़्क़ी बदज़ुबानी से होती है, इसलिए वे एक-से-एक बयान देते हैं।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान-सा क्यूँ है?

Two pine trees bent by the wind on a grassy coastal dune, under a cloudy sky.
"सत्ता चलाने वाला भ्रष्ट होगा तो उसके अधिकारी कर्मचारी ईमानदार रह ही नहीं सकते। जनता में अगर सांस्कृतिक चेतना सजग नहीं है, तो वह भी देखा-देखी भ्रष्टाचार की मनोवृत्ति का शिकार होगी।" - इसी आलेख से

इन दिनों : खुदा मेहरबान तो अनाड़ी पहलवान

"प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों को निर्देश दिया कि देश में गर्मी काफ़ी है, इससे बचने के लिए खूब पानी पियें। मजा यह था कि यह ख़बर ब्रेक कर गयी और चैनल पर महान एंकरों ने इसे ब्रेकिंग ख़बर बनाया। " - इसी आलेख से

इन दिनों : चौदह वर्ष के बाद गौ माता की क़ुर्बानी और राजनीतिक मिथ्याचार

A brown cow grazing on a green pasture in Germany, surrounded by trees.
"चौदह वर्ष तक की गाय माता रहेगी और उसके बाद उसे माता के पद से उतार कर उसकी गर्दन रेत देने में कोई दिक़्क़त नहीं है।" - इसी आलेख से