डॉ योगेन्द्र

डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग


पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

इन दिनों : सरकार को डूबने के लिए चुल्लू भर पानी नहीं मिल रहा

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"देश के वाणिज्य मंत्री से पूछा गया कि क्या भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, तब उनका जवाब था कि विदेश मंत्री ज़वाब देंगे। जब यही सवाल विदेश मंत्री जयशंकर से पूछा गया, तो उनका जवाब था कि इस प्रश्न का उत्तर वाणिज्य मंत्री देंगे। ये लोग देश‌ चला रहे हैं! " - इसी आलेख से

इन दिनों : शीर्ष पर बैठे घाघ लोग

"जब देश आजाद हुआ तो एक राष्ट्रीय सरकार बनी थी, जिसमें विरोधियों को भी जगह मिली थी। पचास-साठ वर्षों तक विरोधियों के साथ दुश्मन की तरह व्यवहार नहीं किया गया, लेकिन इधर के वर्षों में दोनों की ऐसी तनातनी है जैसे दोनों दो देश का नेतृत्व कर रहे हों।" - इसी आलेख से

इन दिनों : जेफ्री एपस्टीन और मौजूदा विकास

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"यह घटना मर्दवादी समाज की पोल खोलती ही है, साथ ही बताती है कि मनुष्य अभी तक निरा जानवर ही है। ज्ञान और विवेक उसे छू तक नहीं पाया है। सत्ता और धन का केंद्रीकरण मौजूदा विकास की जड़ में है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : माननीयों के कुकर्म

"जिस मुख्यमंत्री को संविधान से प्यार नहीं है, उसे सम्मान नहीं देता, उस मुख्यमंत्री को कुर्सी पर क्यों रहना चाहिए? राष्ट्रपति उसे बर्खास्त क्यों नहीं करतीं और प्रधानमंत्री उसे सजा क्यों नहीं देते?" - इसी आलेख से

इन दिनों : सैंया को कोतवाल नहीं होना चाहिए

अगर लोकतंत्र के प्रति आस्था न हो, तो लोकतांत्रिक ढंग से चुन कर आने के बाद या तत्कालीन राजनैतिक शख्सियत से समझौता कर भी आप लोकतंत्र का हत्यारा हो सकते हैं। लोकतंत्र को खत्म करने के लिए कोई जरूरी नहीं…

बजट: बहेलिया आयेगा, दाना डालेगा….

"बजट समता कायम करने नहीं, आर्थिक गैर बराबरी बढ़ाने के लिए लाया जाता है। यह अमीरों का उपक्रम है। सरकार सिर्फ इतना जानती है कि गरीबों से वोट लेना है और वोट लेने के लिए पैसा चाहिए।" - इसी आलेख से

इन दिनों : कहाँ आ गये हम, यों ही चलते-चलते

"मनुष्य में प्रकृति के दोनों गुण मौजूद हैं - सृजन भी और संहार भी। प्रकृति का अपना स्वभाव है। वह किसी से ट्रेनिंग नहीं लेती। मनुष्य के साथ ऐसा नहीं है। वह जन्म लेता है और माँ-पिता, सगे-संबंधी, समाज और परिस्थितियाँ उसे ट्रेन करने लगते हैं।" - इसी आलेख से

इन दिनों : एक अधूरी लड़ाई को अंजाम तक ले जाने की जरूरत

"बीजेपी जातिवादी और संप्रदायवादी पार्टी है। उसके जेहन और उसके समर्थक संगठनों में जातिवादी विषाणु है।‌ वह अपने स्वार्थ के लिए हिन्दू एकता की बात करती है, लेकिन जाति खत्म करने की बात नहीं करती।" - इसी आलेख से

इन दिनों : वसंत के चपल-चरण और मान-अपमान कथा

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"पिछले पाँच वर्षों में आईआईटी, आईआईएम तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व के उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग 100 छात्रों ने आत्महत्या की है। इनमें से प्रायः सभी छात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों से थे।" - इसी आलेख से

इन दिनों : लोकतंत्र, नागरिक-बोध और हत्यारे

A gray tour bus parked on a road.
"सच बहुत कड़ुआ होता है, मगर एक समय ऐसा आता है कि बोलना पड़ता है। न चाहते हुए भी, लबों पर सच फूटने लगता है। क्योंकि सच बोलना समाज के जिंदा रहने का प्रतीक है।" - इसी आलेख से