इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : निर्वसन मैदान में लेटी हुई है एक नदी"परसों रात को लगभग दो बजे नींद उचट गई तो मैंने बल्ब जलाया और स्वामी विवेकानंद की पुस्तक लेकर पढ़ने लगा। जब भी मन में बहुत ज़्यादा उद्वेलन होता है तो विवेकानंद सुकून देते हैं।" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रMay 4, 20261 Comment