इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : अनासक्ति और कामना "संसार से मुक्त होने की कामना भी क्या एक कामना नहीं है? मनुष्य भावनाओं और विचारों की दुनिया में छटपटाता रहता है। जन्म लेता है तो मन विराट रहता है। परिवार और समाज के बीच रहते हुए संकीर्ण होता जाता है।" -इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रApril 12, 20261 Comment
इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : विचार सरहदों में नहीं बँधते"जहाँ रचना है, वहाँ सीमाहीनता है। जहाँ कट्टरता है, वहाँ सीमाएँ-ही-सीमाएँ हैं।" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रMarch 23, 2026