इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : चिंता और चिंतन"चिंता होती है, तभी चिंतन होता है। चिंता तात्कालिक स्थितियों से जुड़ी होती है और चिंतन चिंता की एक समझ है और है चिंता से उबरने के लिए रास्ते की तलाश। अगर चिंता न हो, तो चिन्तन संभव ही नहीं है।" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रJanuary 26, 20261 Comment