इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : और चाँद चू गया"चाँद तो सूरज से रोशनी लेता है। आदमी भी एक-दूसरे से ज्ञान प्राप्त करता है। ज्ञान ही तो आदमी की रोशनी है, वरना आठ जगहों से टेढ़े अष्टावक्र जनक के दरबारियों को चुनौती कैसे देता!" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रApril 23, 20262 Comments
इहलोकतंत्रघड़ी चाहिए या समय?"मैंने सोचा इस तंत्र में पैसा कमाकर भी घंटा उखाड़ लूँगा। इसलिए मैंने कमाने का सपना देखना ही छोड़ दिया।" क्यों? पढ़िए इस आलेख में सुकांत कुमारJanuary 19, 20263 Comments