इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : पीपल का साधु-भाव और गोबर-गौमूत्र के जलवे "पीपर के नीचे हँसी- मजाक और कभी बोगिलबाजी। हम बच्चे बोगिल (धरती पर चौकोर खींचीं रेखाएँ) बनाकर गुल्लियाँ टनकारते। अब गाँव से गुल्ली और गाय दोनों ग़ायब हो गए हैं।"डॉ योगेन्द्रApril 24, 20261 Comment