इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : लोकतंत्र की ऐसी-तैसी"चुनाव में निष्पक्षता किताबों में पढ़िए और ख़ुश रहिए। मरती हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था का हम सब दिग्दर्शन करें।" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रApril 8, 20264 Comments