इन दिनों : रोपे पेड़ बबूल के तो आम कहाँ से होय

"हर जाति ने अपने नायक ढूँढ लिया है। आज़ादी की लड़ाई में वैसे नायक ढूँढे जाते थे, जिन्होंने देश के लिए शहादत दी हो। अब जब खा-पीकर तगड़े हो रहे हैं तो देखादेखी हरेक जाति ने अपने-अपने नायकों की तलाश शुरू की।" - इसी आलेख से
