इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों :अनिर्वचनीयता के बीच सृष्टिखोर"असली जानवर तो बड़े-बड़े नगरों में हैं, जो सृष्टि के असल दरिंदे हैं। यह अनपढों से भी गये गुज़रे हैं। आदमखोर नहीं, सृष्टिखोर।" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रMarch 27, 2026
इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : आप कहाँ हैं अरावली के शेरो!"अगर आपकी आँखों पर भी नारे और वादों की पट्टी है या नेताओं के धूर्त-जाल में फंस गए हैं तो अरावली से लेकर तमाम नदियों, सागर, जंगल, जल आदि को लुटने दीजिए। ऐसी हालत में इस धरती पर अंततः फंसड़ी लगाने के सिवा कोई विकल्प नहीं है।" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रDecember 26, 20254 Comments