इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : जाति के दड़वों की घुटन"जाति एक दड़वा बनाती है, जिसमें इंसान घुटता रहता है। जाति के हजारों दड़वे हैं और उन दड़वों में इंसान जितना भी स्नान कर ले, लेकिन देह पर फिर भी मैल जमी ही रहती है, मुक्तिबोध के ब्रह्मराक्षस की तरह।" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रFebruary 22, 20261 Comment