"परीक्षा इतनी जरूरी हो गई है कि कुछ भी कर उसे जीतना है। युद्ध भी है, और प्यार भी — यहाँ सबने सब कुछ जायज़ मान लिया है। साम-दाम-दंड-भेद किसी भी तरह बस परीक्षा निकालनी है।" - इसी आलेख से
"जब तक किसी को अशिक्षा, बीमारी, और युद्ध से मुनाफा होता रहेगा, कोई सुरक्षित नहीं रहेगा। सरकारों की पहली प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य होना चाहिए, जो हमें सिर्फ़ वहीं मिल सकता है, जहाँ हम रहते हैं।" - इसी आलेख से
अर्थशास्त्र की बुनियाद अभाव पर टिकी है, और वाणिज्यशास्त्र का आधार व्यापार पर। आइए! समझते हैं कैसे? इस अध्याय में हम दोनों का अंतर समझेंगे और यह जानने की कोशिश करेंगे कि इनकी हमारी जिंदगी में क्या जरूरत है। जरूरी…
कुछ संत महिलाओं पर लगातार अभद्र टिप्पणियाँ कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। ये वही संत हैं, जो हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। ऐसा हिंदू राष्ट्र, जिसमें महिलायें मानवीय इकाई नहीं, एंजॉयमेंट का उपकरण होंगी।