इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : बदलते वक्त में बेचैन चेतना"सुख कब दुख में बदल जाता है, कहा नहीं जा सकता। देह बहुत सुखी हुआ तो डायबिटीज, ब्ल्डप्रेशर, कैंसर। मन को ज्यादा सुख मिला तो अकेलापन।" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रJanuary 3, 20261 Comment