डॉ. जी शंकर

डॉ. जी शंकर

डॉ जी शंकर तीन दशकों से अधिक से अध्यापक शिक्षा और शैक्षिक अनुसंधान से जुड़े रहे हैं. अध्यापक शिक्षा में एएसयू, यूएसए में पूर्व सहायक संकाय। वह अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच(एआईएफआरटीई )के कार्यकारी परिषद के सदस्य और भारतीय सामाज विज्ञान अकादमी(आईएसएसए) के उपाध्यक्ष हैं।
ई- मेल: g.shankar.begusarai@gmail.com

पराधीन शिक्षक : नौकरशाही वर्चस्व और शिक्षकीय स्वायत्तता का संकट

"राज्य को शिक्षक से एक वैचारिक कार्य — सहमति,  अनुशासन और सामाजिक व्यवस्था की वैधता का निर्माण— चाहिए। परंतु वह उसे उसी बिना उत्पादक योगदान के आर्थिक लाभ निचोरने वाले नौकरशाही ढाँचे के अधीन रखता है, जो अर्थव्यवस्था के अन्य निम्न-वेतन संविदा श्रम को नियंत्रित करता है।" - इसी आलेख से

 परीक्षा बनाम उन्मूलन : भारत में भय का उत्सव और असफलता का दंड

"एक वैज्ञानिक सार्वभौमिक शिक्षा प्रणाली- सामान्य, सुवित्तपोषित, निरंतर मूल्यांकित तथा उच्च-जोखिम से पूर्ण परीक्षाएँ लीक व रैकेटों से मुक्त- कोई काल्पनिक स्वप्न नहीं, बल्कि ठोस, पहले से परखे जा चुके तत्वों का एक समुच्चय है, जिसे मिलाने के लिए बस राजनीतिक इच्छाशक्ति की प्रतीक्षा है।" - इस आलेख की स्थापना