बुलडोज़र न्याय बनाम संवैधानिक नैतिकता

"झोपड़ियाँ इसलिए नहीं उगतीं कि लोग क़ानून तोड़ने का आनंद लेते हैं, बल्कि इसलिए कि शहर रोज़गार तो देता है, रहने की जगह नहीं। गाँवों से मजबूरी में हुआ पलायन, असंगठित श्रम, न्यूनतम मज़दूरी और महँगा शहरी आवास—ये सब मिलकर झोपड़ी को अपराध नहीं, बल्कि विकल्पहीनता का परिणाम बना देते हैं।" - इसी आलेख से।
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शिक्षक, भौतिक बिज्ञान
कोषाध्यक्ष, बिहार राज्य समिति, एटक

अमर नाथ
अमर नाथ

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कोषाध्यक्ष, बिहार राज्य समिति, एटक

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