भारत में लोगों को काम मिल नहीं रहा है और एआई से काम के घंटे आधे रह जायेंगे और काम पहले से दोगुना होगा। खुश होइए भाई लोग। आर एस एस के सरसंघचालक मोहन भागवत कहते हैं – ओ हिन्दुओ, कम से कम तीन बच्चे जन्माओ, तभी हिन्दुओं का उद्धार होगा। खुद ने कोई प्रयास नहीं किया, लेकिन हिन्दू उपदेशक तड़ातड़ बच्चे जनमाने के फिराक में हैं। अरे भाई, जनमा कर काम कहाँ से दोगे? तुमने अपना कुछ तो विकसित नहीं किया। पोंगापंथी बने रहे। पोथी पतरा दिखा कर अपना चलाते रहे और हिन्दू समाज को गर्त में धकेल दिया। हरेक हिन्दू का भाग्य मोहन भागवत या नरेंद्र मोदी या अमित शाह की तरह नहीं हो सकता। किसी ने शादी नहीं की, किसी ने किया तो छोड़ दिया और किसी ने जनमाया तो क्रिकेट के काम में लगा दिया।
भारत में आबादी का जबर्दस्त उछाल है। काम नहीं मिलने से युवा परेशान है। उदासी और फ्रस्ट्रेशन के कारण आत्महत्या तक कर रहे हैं और यहाँ एआई है। एआई सब कुछ का इलाज नहीं है। इसे मनुष्य का विकल्प नहीं बनाया जाय। हर चमकती चीजें सोना नहीं होतीं। इसका सीमित उपयोग हो। जहाँ इसकी बहुत जरूरत है। पूँजीपतियों को श्रमिक नहीं चाहिए। श्रमिक का काम मशीन कर देगी तो उसे श्रमिक रखने की क्या गरज है? धनपशु को तो धन चाहिए। उसे श्रमिक से क्या मतलब?
ऐसे समाज में जहाँ श्रम की अधिकता है, उसे ऐसा यंत्र क्यों चाहिए जो श्रम की जरूरत को कम करता जाय। अगर खेती भी यंत्र करेगा। कारखाने भी वही चलायेगा और सेवा सेक्टर में भी उसका ही उपयोग होगा तो आदमी क्या करेगा? वैसे आदमी के दिमाग में भी जबर्दस्त उछाल है। एक तरफ बाबर-औरंगजेब करता रहता है। गांधी -नेहरू पर लाठी चलाता है और फिर एआई की भी बात करता है। बढ़िया रहता कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी नाले की गैस से चाय बना कर प्रदर्शन करती। प्रधानमंत्री की नयी तकनीक पूरी दुनिया के लिए मिसाल कायम करती या बादलों में राडार काम नहीं करे, कुछ ऐसी ही तकनीक का विकास करता या फिर थाली पीट कर रोग मुक्ति का अभियान चलाता।
प्रधानमंत्री के उर्वर दिमाग से विज्ञान और भूगोल और समाजशास्त्र के जो नवज्ञानगक निकले हैं, उसी पर काम करता। चमचागिरी के बहुत से रास्ते हैं। भारत में इस तकनीक का भी जबर्दस्त विकास हुआ है। भोले-भाले बच्चों से लाखों ठग कर एक तख्ती पकड़ा दी। बच्चे को मालूम ही नहीं है कि इस तख्ती का क्या उपयोग है। ग्यारह सालों में सरकार ने इतना भर किया है कि जेएनयू को खत्म कर गलगोटिया यूनिवर्सिटी के विकास में अपना दिमाग लगाया है।
इन सालों में एक आकलन कर लीजिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धार्मिक कार्यों में कितना समय दिया और देश के विज्ञान, संस्कृति और उद्योग के विकास में कितने दिन लगाये? इन्होंने एक काम अभूतपूर्व ढंग से किया। अमित मालवीय जैसे लोगों को जिम्मा दिया कि संगठित ढंग से देश तोड़ने में लग जाओ। हिन्दू-मुस्लिम इतना करो कि देश चिंचया कर रह जाये। कोर्ट को भी शाबाशी देना चाहिए कि पाँच वर्षों से जो नवयुवकों को जेल में बंद रखा है, उसका न ट्रायल करे, न ज़मानत दे। सरकार ने मुकदमा ठोक दिया, लेकिन वह प्रमाण पेश नहीं करेगी और कोर्ट पिछलग्गू बना रहेगा। लोकतंत्र की इस गाथे की कल्पना शहीदों ने नहीं की थी।
जो भी हो, गलगोटिया कोई एक दिन में पैदा नहीं होता। उसकी भी लंबी परंपरा है। झूठ का जो टोकरा प्रधानमंत्री ने जनता को थमाया है, उसमें गलगोटिया यूनिवर्सिटी का ही विकास हो सकता है। मुबारक हो गलगोटिया-संस्कृति गलगोटिया जी को। सही है भाई, रोपे पेड़ बबूल के तो आम कहाँ से होय। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बलात्कार को लेकर एक निर्णय दिया है। अमृत काल में ऐसा ही फैसला आ सकता है। न्यायपालिका का यह क्षरण बताता है कि अब लोक और तंत्र की खैर नहीं।

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग
पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर






