इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : ज़िंदगी ज़िंदादिली का नाम है "इस बार मैंने बगीचे को क़रीब से देखा- मंजर लगने से फल टूटने तक। बीच में आँधी आयी। लाखों अमौरियॉं झडीं। बहुत कुछ हुआ।" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रJune 29, 2026