इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : सत्य की छाती पर असत्य का तांडव"आंदोलन की शमा कब की बुझ चुकी। उससे जो आंदोलनकारी निकले, सत्ता में जाकर उन्होंने कोई नया इतिहास नहीं लिखा, बल्कि जिन मुद्दों के खिलाफ आंदोलन किया, उन्हीं में वे समा गए।" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रMay 3, 20261 Comment