इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : अजीब दास्ताँ है ये, कहाँ शुरू, कहाँ ख़त्म…"यह सच है कि काल की चक्की चल रही है, एक दिन उस चक्की में पिसना ही है, मगर मनुष्य आख़िर सच्ची ख़ुशी कहाँ से लाये?" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रApril 21, 2026