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इन दिनों : सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान-सा क्यूँ है?

Two pine trees bent by the wind on a grassy coastal dune, under a cloudy sky.
"सत्ता चलाने वाला भ्रष्ट होगा तो उसके अधिकारी कर्मचारी ईमानदार रह ही नहीं सकते। जनता में अगर सांस्कृतिक चेतना सजग नहीं है, तो वह भी देखा-देखी भ्रष्टाचार की मनोवृत्ति का शिकार होगी।" - इसी आलेख से

इन दिनों : हर मर्ज की एक दवा- गोबर और गौ मूत्र

"पाखंड और अंधविश्वास परोस कर लोगों के कान, आँख और मुँह बंद कर दिए। ऐसी सीख और पट्टी पढ़ाई कि वे असत्य को सत्य मानने लगे। प्रधानमंत्री को देश को नये मुकाम पर ले जाना था तो चंदन टीका लगा कर सोलहवीं शताब्दी में खींच कर ले गए।" - इसी आलेख से

इन दिनों : पुनर्जागरण की जरूरत और पाखंडियों के स्वर

यह देश आज भी अस्त-व्यस्त, शंकालु और अरक्षित है। अनेक प्रयासों के बावजूद पुनर्जागरण के बदले प्रतिपुनर्जागरण हो रहा है। पढ़िए इस लेख में।

अंधेरा कायम है

बहुत पुराने जमाने की बात है। चारों ओर ऊँचे-ऊँचे पहाड़ थे, दूर-दूर तक फैला हुआ सघन जंगल था और उस जंगल में मारकर खा जाने वाले तथा मरकर खाये जाने वाले जानवरों की भरमार थी। उसी जंगल के बीच पहाड़ों की तलहटी में एक बस्ती थी। ऊँचे पहाड़ों और भयावह दुर्गम जंगलों से घिरी हुई उस बस्ती में न तो कभी कोई बाहर से आता था और न ही उस बस्ती के लोग बाहर जा पाते थे।