
"कोई मक्खी यों ही नहीं निगलता। इसके लिए मूल्य चुकाने होते हैं। यह मूल्य पैरवी और पैसे के रूप में चुकाए जाते हैं, लेकिन इस मूल्य के बदले में मरती है उच्च शिक्षा।" - इसी आलेख से

"दरअसल सरकार समझने में असमर्थ है कि राज्य के विकास में काम चाहिए। भ्रष्टाचार मुक्त सरकारी दफ्तर चाहिए। सम्मान से जीने के संसाधन चाहिए। पेट को अन्न चाहिए।" - इसी आलेख से

जीविका दीदियाँ मछली पालन करेंगी, इसके लिए तालाब बनवाया गया। तालाब में पानी नहीं था तो मुख्यमंत्री के आने के दिन उसमें बोरिंग से पानी भरा गया। मुख्यमंत्री वही तालाब जीविका दीदियों को समर्पित करके चले गए।

हमाम में नंगे लोग अगर सबको कपड़े पहनने का आह्वान करे तो उसकी बात कोई क्यों मानेगा? जिसके हाथ अपराधियों को टिकट देने से नहीं कांपे और हत्यारोपी विधायक बनाता रहे, उसके राज में अपराध खत्म कैसे होगा?