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इन दिनों : आदमी होने की कसौटी

black and white human statue
"मृत्यु सिर्फ देह की क्षय से नहीं होती। देह रहते हुए भी मृत्यु हो जाती है। आपके अंदर का इंसान जैसे-जैसे छीजता जाता है, वैसे-वैसे आपकी मृत्यु होती जाती है। वह समाज मृत ही समझिए, जहाँ इंसानियत का टोटा पड़ जाता है।" - इसी आलेख से

कुछ कुछ होता है

" इलेक्ट्रोल बांड के द्वारा जो पैसा आया, वह वैध बना रहा। इस बांड के द्वारा सरकार ने कितने घोटाले किए, पूँजीपतियों ने काले को सफेद बनाया, इसके बदले में सरकार ने पूँजीपतियों को ठेका दिया और सरकारी संपत्ति का वारा न्यारा किया - इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट चुप रहा। यह अधूरा फैसला था। अगर सुप्रीम कोर्ट इसकी तह में जाकर व्यवस्था की पोल-पट्टी खोलता तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बड़ी कृपा होती।" इसी आलेख से

हिंदू धर्म का इस्लाम हो जाना…

"क्रिसमस में चर्च जल रहे, युवाओं को पार्क में पीट रहे, नदी - मंदिर में किसी खास को जाने से रोक रहे। दूसरे धर्म के त्योहार में रुकावट बन रहे हैं तो अपने त्योहार को तमाशा बनाने पर तुले हैं। अरे, जबकि यह बस धर्म का विषय नहीं है, यह आपकी संस्कृति के हनन का विषय है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है युधिष्ठिर?

"आदमी को लगता है कि वह ही धरती का नियंता है। एक दिन उसका शरीर अर्थी पर पड़ा रहता है। उसके लिए हल्के-फुल्के आँसू जरूर बहते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर इस बात की तैयारी हो रही होती है कि अर्थी कैसे जल्द-से-जल्द चिता बने।" - इसी आलेख से

इन दिनों : तुलसीदास मस्जिद में क्यों सोना चाहते थे

"तुलसीदास बहुत तंग हुए बनारस में। उनके समय से लेकर अब तक कितने मंदिर बने। आश्चर्य यह है कि मंदिर बनाने के लिए मुस्लिम बादशाहों ने जमीन दी।‌ मगर एक बनावटी कथा में तुलसीदास के राम घिर गए। बाबरी मस्जिद में आधुनिक स्वार्थी राजनीतिक संतों ने राम को उलझा दिया।" - इसी आलेख से

इन दिनों : मत रो माता, लाल तेरे बहुतेरे

"धरम के वरद पुत्र कितने अधार्मिक हैं! इन्हें वंदे मातरम् का शौक चढ़ा है। मातरम् के पुत्रों को खूब कूटो और वंदे मातरम् के जरिए देश में घृणा का माहौल बनाओ।" - इसी आलेख से

इन दिनों : आँख के अंधे, नाम नयनसुख

कुछ संत महिलाओं पर लगातार अभद्र टिप्पणियाँ कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। ये वही संत हैं, जो हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। ऐसा हिंदू राष्ट्र, जिसमें महिलायें मानवीय इकाई नहीं, एंजॉयमेंट का उपकरण होंगी।

इन दिनों : स्वामी विवेकानंद और धार्मिक कट्टरवाद

स्वामी विवेकानंद वेदांत लेकर विदेश पहुंचे थे, लेकिन उन्हें इस बात का गहरा अहसास था कि सभी धर्म एक ही राह के राही हैं। जब वे शिकागो में विश्व धर्म संसद में भाग ले रहे थे तो उन्होंने एक किस्सा…

इन दिनों : हनुमान जी और आधुनिक बाबा

एक बाबा चले थे हिन्दू राष्ट्र बनाने। तीन दिनों में ही भदभदा कर गिर गये। पांव में छाले, देह में बुखार और दिमाग बेहोश। उनकी हनुमान जी से फ़ोन पर बात होती थी। बेहोश जब होने लगे तो उन्होंने हनुमान…

इन दिनों : बुद्धिखोर और आधुनिक अंगुलिमाल 

धर्म और पूँजी के खेल में आमजन इस तरह उलझ गया है कि उसकी स्वचेतना समाप्त हो गई है। वह बाबाओं और मुनाफाखोरों के चश्मे से दुनिया को और ख़ुद अपने जीवन को भी देखने लगा है।