कुछ कुछ होता है

" इलेक्ट्रोल बांड के द्वारा जो पैसा आया, वह वैध बना रहा। इस बांड के द्वारा सरकार ने कितने घोटाले किए, पूँजीपतियों ने काले को सफेद बनाया, इसके बदले में सरकार ने पूँजीपतियों को ठेका दिया और सरकारी संपत्ति का वारा न्यारा किया - इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट चुप रहा। यह अधूरा फैसला था। अगर सुप्रीम कोर्ट इसकी तह में जाकर व्यवस्था की पोल-पट्टी खोलता तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बड़ी कृपा होती।" इसी आलेख से
जन पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए उपर्युक्त QR Code को स्कैन करके 20, 50 या 100 रुपये की सहायता राशि प्रदान कर सकते हैं।
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प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर

डॉ योगेन्द्र
डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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