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गांधी, अम्बेडकर, फ्रेरे : मुक्ति की तीन शैक्षिक परियोजनाएँ (भाग 6)

यह आलेख पॉलो फ्रेरे के शिक्षा-सिद्धांत का छठा और अंतिम भाग है। इस भाग में गांधी, अम्बेडकर और फ्रेरे के शिक्षा-सिद्धांतों की समीक्षा की गयी है। आलेख में तीनों की पृष्ठभूमि और दिशा की भिन्नता के बावजूद साझा बिंदु की पड़ताल की गयी है और उनकी तुलना भी।

भारतीय संदर्भ में नई तालीम का प्राणालिक औचित्य

यदि भारत को शिक्षा का सिरमौर होना है, बेरोजगारी की समस्या को दूर करना है, उत्पादन में बढ़ोत्तरी करनी है, गाँवों का विकास करना है और समाज में नैतिकता का वर्चस्व स्थापित करना है तो उसे ‘नई तालीम’ की अवधारणा को स्वीकार करना ही पड़ेगा।