जन पत्रकारिता, पर्यावरणदूर हो गई नदी"बाहरी लोगों के लिए वह जंगल पर्यटन-स्थल था, प्राकृतिक धरोहर था, सेल्फी-पॉइंट था। लेकिन गाँव के लोगों के लिए राशन कार्ड था, औषधालय था, रोजगार था और सुरक्षा भी।" - इसी आलेख से Dr. Anil Kumar RoyJanuary 2, 20264 Comments
इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : सेठाश्रयी संस्कृति के गुनाहगारलोग शांत इसलिए हैं, क्योंकि वे सरकार और पूँजीपतियों की बेईमानी नहीं समझ रहे हैं। यह देश के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न कर रहा है।डॉ योगेन्द्रNovember 20, 20251 Comment