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संसाधनों के दोहन से बिगड़ता प्राकृतिक संतुलन : एक विश्लेषण

"प्राकृतिक संतुलन का तात्पर्य उस सामंजस्य से है, जिसमें सभी जैविक और अजैविक घटक एक-दूसरे के साथ संतुलित रूप से क्रियाशील रहते हैं। जब यह संतुलन बना रहता है, तब पृथ्वी पर जीवन सुचारु रूप से चलता है। किंतु ...." - इसी आलेख से

दूर हो गई नदी

"बाहरी लोगों के लिए वह जंगल पर्यटन-स्थल था, प्राकृतिक धरोहर था, सेल्फी-पॉइंट था। लेकिन गाँव के लोगों के लिए राशन कार्ड था, औषधालय था, रोजगार था और सुरक्षा भी।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सेठाश्रयी संस्कृति के गुनाहगार

AI से जेनरेट किया गया प्रतीकात्मक चित्र
लोग शांत इसलिए हैं, क्योंकि वे सरकार और पूँजीपतियों की बेईमानी नहीं समझ रहे हैं। यह देश के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न कर रहा है।