
व्यतीत का विश्लेषण राजनीतिक उठा-पटक और छल-छद्म को समझने में सहायक हो सकता है। परंतु वास्तविक चिंता राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संभावनाओं की होनी चाहिए। यह आलेख इन्हीं संभावनाओं का विश्लेषण करने की कोशिश करता है।

"देश में सत्ता की ओर से फैलाई जा रही नफ़रत और हिंसा के शिकार कौन होगा, कहा नहीं जा सकता। इतना भर जरूर कहा जा सकता है कि आसार अच्छे नहीं हैं।" - इसी आलेख से

"बीजेपी ने जिसे 'पप्पू' कह कर नीचा दिखाना चाहा, वह 'राउडी' कैसे हो गया? ...... बीजेपी ने इतना नोंचा-खसोटा, लोकतंत्र की जैसी-तैसी की, बार-बार निशाना ठोकता रहा कि सीधा बैल मरखंडा हो गया।" - इसी आलेख से

इस विश्लेषण में लेखक ने तेघड़ा विधानसभा के चुनावी परिदृश्य का विश्लेषण किया है। लेखक के अनुसार चुनाव आसान नहीं है। लेकिन संभावनाओं का विश्लेषण किस ओर इंगित करता है, इसे जानने के लिए पढ़ें यह लेख -

लोकसभा चुनाव में अपने बूते 240 सीट प्राप्त कर भाजपा अल्पमत में है। अब उसे सरकार बनाने के लिए जदयू और टीडीपी के समर्थन की अत्यधिक जरूरत है। उक्त दोनों दलों ने समर्थन देकर सरकार बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। शुरुआत में एनडीए गठबंधन की सरकार की बात करने वाले नरेन्द्र मोदी ने पुनः अपने पुराने स्वेच्छाचारी रवैए का परिचय देना शुरू कर दिया है। इस बात की पुष्टि मंत्रीमंडल के गठन से स्पष्ट हो जाती है। लगभग सभी महत्वपूर्ण विभाग भाजपा के नेताओं को सुपुर्द कर दिया गया है और एनडीए के घटक दलों खासकर जदयू एवं टीडीपी को झुनझुना थमा दिया गया है।