डॉ योगेन्द्र

डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग


पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

इन दिनों : डमरूवाद का घनचक्कर

"आर एस एस या बीजेपी के कार्यकताओं को हिन्दू एकता इसलिए चाहिए कि उनकी सत्ता कायम रहे। राम कथा वाचक भी जाति गिनते नजर आते हैं। उन्हें अपने ब्राह्मण होने पर बहुत गर्व है। इन लोगों को हिन्दू राष्ट्र चाहिए। इनके स्वभाव और विचार से ऐसा लगता है कि उन्हें ऐसा हिन्दू राष्ट्र चाहिए जिसमें जाति का वर्चस्व कायम रहे।" इसी आलेख से

इन दिनों : बर्बर पशुता और खंडित मर्यादाओं के युग में

"क्या ईडी के ऐसे अफसरों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जो रेड डालते हैं और कोर्ट में दोष सिद्ध नहीं कर पाते? क्या उनकी अफलातूनी कार्रवाई से सामान्य लोग परेशान नहीं होते और उनके मौलिक अधिकारों में क्या यह हस्तक्षेप नहीं है? ईडी की नासमझ कार्रवाई से ईडी पर गहरे सवाल हैं।" - सवाल, जो इस आलेख से निकलते हैं।

इन दिनों : सौंदर्य और स्वाभिमान

"जंगल और वनों को हमने नहीं बनाये। कुदरत ने करोड़ों पेड़ों का संवर्धन किया। जीव जंतु, झरने, नदियाँ। खूबसूरती। मगर दो टके के राजनेता और पूँजीपतियों ने इस खूबसूरती को उजाड़ा।" - इसी आलेख से

इन दिनों : अथ श्री महाभारत कथा

महाभारत एक मुकम्मल कथा है। रिश्ते ऐसे-ऐसे कि सहज विश्वास नहीं होता। यहाँ मनुष्य का सरलीकरण नहीं है कि ईमानदार है तो हर समय ईमानदार ही रहेगा।

इन दिनों : आजाद नस्लों पर मंडराते खतरे

"विदेशी कुत्ते विद्रोही नहीं होते। देशी कुत्ते झाँव-झाँव कर लेते हैं। विदेशी कुत्ते जितने मालिक के गुलाम होंगे, वे उतने ही सफल होंगे। उनकी सफलता गुलामी में है। बिना मेहनत के जो आदमी सफल होना चाहता है, उसमें विदेशी कुत्ते का गुण चाहिए।" - इसी आलेख से

इन दिनों : आदमी होने की कसौटी

black and white human statue
"मृत्यु सिर्फ देह की क्षय से नहीं होती। देह रहते हुए भी मृत्यु हो जाती है। आपके अंदर का इंसान जैसे-जैसे छीजता जाता है, वैसे-वैसे आपकी मृत्यु होती जाती है। वह समाज मृत ही समझिए, जहाँ इंसानियत का टोटा पड़ जाता है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : जीने की कला में छेद

"हमारे देश में अनेक धर्म, अनेक जाति और अनेक संस्कृतियाँ हैं। जो बहुल संस्कृति से प्यार करेगा, वही सच्चा भारतीय होगा।" इसी आलेख से

इन दिनों : असभ्य घटनाओं पर चुप्पियों के अर्थ

"यह देश जिसे गर्व है कि पहले यहाँ सभ्यता उतरी। दुनिया का सबसे पुराना ग्रंथ वैदिक साहित्य जहाँ सृजित हुआ, वहाँ मल-मूत्र से भरा पानी हजारों लोगों को पिला दिया जाता है। पंद्रह सनातनी मर चुके हैं और सैकड़ों अस्पताल में छटपटा रहे हैं। क्या यह सभ्यता है?" - इसी आलेख से

इन दिनों : बुद्धिखोरों की सड़ांध

"मुझे गर्व होता है कि मैं उस देश का वासी हूँ, जहाँ बुद्ध हुए हैं, लेकिन मुझे बुद्धिखोरों को लेकर शर्म आती है कि तात्कालिक लाभ के लिए इन्होंने अपने को गिरवी रख दिया है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : ट्रंप की दादागिरी और वेनेजुएला के सबक

"जिस युग में किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति और उसकी पत्नी को घसीट कर बंधक बनाया जा रहा हो, उस युग को ज्ञान का युग कहना, भारी बेवकूफी है। ट्रंप को जिसने वोट दिया, वह समझे कि एक बददिमाग आदमी को उसने वोट दिया है। अगर लोग सावधान नहीं रहे तो ट्रंप दुनिया को गटर बना देगा।" - इसी आलेख से