डॉ योगेन्द्र

डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग


पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

इन दिनों : युद्ध के ख़िलाफ़ वायलिन और शहनाई

"युद्ध अगर बदतमीजों के हथियार हैं तो गुनगुनाना इंसानों के। सभ्यताएँ गुनगुनाने से समृद्ध होंगी।" - इसी आलेख से

इन दिनों : लोकतंत्र की ऐसी-तैसी

grayscale photo of people walking on street
"चुनाव में निष्पक्षता किताबों में पढ़िए और ख़ुश रहिए। मरती हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था का हम सब दिग्दर्शन करें।" - इसी आलेख से

इन दिनों : तुलसी इस संसार में भाँति-भाँति के लोग

Casual gathering of friends enjoying beer and conversation at a rooftop bar.
हमारी संस्कृति में नशापान अनन्य रूप से शामिल है। देवी-देवता नशापान करते हैं और धार्मिक आयोजनों में शराब और भाँग-धतूरे का प्रयोग होता है। फिर भी कुछ बातें ऐसी हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

इन दिनों : वक़्त का परिंदा रुका है कहाँ! 

"वतन के वास्ते मिट गए बिस्मिल जैसे हज़ारों लोग और अब के सत्ताधारी स्वार्थ के वास्ते वतन को ही चींथ रहे हैं।" - इसी आलेख से

इन दिनों : संस्कृतिहीनता के युग में

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"वे खूब ज्ञान परंपरा की तलाश करें, लेकिन वे बतायें कि वे ज्ञान परंपराएँ इतनी निर्बल क्यों थीं कि भारतीय परस्पर घृणा करते रहे और देश ग़ुलाम होता रहा?" पढ़िए इस आलेख में

इन दिनों : मुझे रहजनों से गिला नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है

"अड़ानी एनटीपीसी स्थल में ज्योंही हमलोगों ने प्रवेश किया, पहाड़िया जाति के बीसों स्त्री-पुरुष आ गए। ये लोग हताश-निराश हैं। कोई आता है तो उनके अंदर हल्की-सी आशा बंध जाती है।" इसी आलेख से

इन दिनों : सच्चे बच्चों की चेतना में भूकंप

A mother correcting her teenage daughter's behavior during breakfast, conveying parenting dynamics.
"बच्चों को किताबों और नेट में झोंक दीजिए, फिर तो यंत्र ही बनेंगे और नहीं बन सके तो किसी कुकांड के शिकार होंगे। ऐसे ही बिगड़े बच्चों के मुँह पर ताले नहीं होते।" - इसी आलेख से

इन दिनों : अँधेरे में लिपटता सत्य

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सोशल मीडिया पर या तो आप एआई की गिरफ्त में हैं या नफ़रत की या विज्ञापनों की। बहुत कम पोस्ट तार्किक और बौद्धिक होते हैं।