Category जन पत्रकारिता

इन दिनों : बरसे कंबल, भीजे पानी

"जिस देश की अस्सी फीसदी जनता को खाने के पाँच किलो अनाज सरकार दे रही है ।‌ दो सौ लाख करोड़ रुपए देश पर विदेशी कर्ज है। डालर की तुलना में रुपये की कीमत धड़ाधड़ गिर रही है। पेट्रोल से लेकर बाजारू सामान की कीमत पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। वहाँ प्रधानमंत्री की रैलियों पर इतना खर्चा क्या बताता है?" - इसी लेख से

इन दिनों : रेप पीड़िता, कुलदीप सेंगर और न्यायालय

"इस संगीन अपराधकर्म में न्यायपालिका भी है, विधायिका भी और कार्यपालिका भी। तीनों पर से वस्त्र उतर रहे हैं। बिल्किस बानो का केस याद होगा। निचली अदालत अपराधियों की सजा माफ करता है। अपराधी जेल से निकलता है तो ध्वजधारी पार्टी के लोग माला लेकर उसके स्वागत में नारे लगाते हैं। यह कौन समाज है भाई!" - इसी आलेख से

भारत पढ़ाकुओं का सिरमौर कैसे है?

दुनिया में सबसे अधिक पढ़नेवाले देशों में भारत का स्थान दूसरा है। जबकि यहाँ बमुश्किल 10 प्रतिशत लोग मैट्रिक पास हैं। उनकी पढ़ाई का स्तर भी श्लाघनीय नहीं है। तो फिर वे कौन हैं, जिनके कारण भारत दुनिया का दूसरा सबसे पढ़ाकू देश है? - पढ़िए इस आलेख में।

इन दिनों : आप कहाँ हैं अरावली के शेरो!

"अगर आपकी आँखों पर भी नारे और वादों की पट्टी है या नेताओं के धूर्त-जाल में फंस गए हैं तो अरावली से लेकर तमाम नदियों, सागर, जंगल, जल आदि को लुटने दीजिए। ऐसी हालत में इस धरती पर अंततः फंसड़ी लगाने के सिवा कोई विकल्प नहीं है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : रिश्तों की मृत्यु कहीं आदमी की मृत्यु तो नहीं!

"यह बात सही है कि आर्थिक तंगी भी कई समस्याओं को जन्म देती है। लेकिन आर्थिक तंगी खत्म होने के बाद भी आदमी संतुष्ट कहाँ रह पाता है? आखिर आदमी क्या ढूँढ रहा है?" - इसी आलेख से

इन दिनों : हर मर्ज की एक दवा- गोबर और गौ मूत्र

"पाखंड और अंधविश्वास परोस कर लोगों के कान, आँख और मुँह बंद कर दिए। ऐसी सीख और पट्टी पढ़ाई कि वे असत्य को सत्य मानने लगे। प्रधानमंत्री को देश को नये मुकाम पर ले जाना था तो चंदन टीका लगा कर सोलहवीं शताब्दी में खींच कर ले गए।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है युधिष्ठिर?

"आदमी को लगता है कि वह ही धरती का नियंता है। एक दिन उसका शरीर अर्थी पर पड़ा रहता है। उसके लिए हल्के-फुल्के आँसू जरूर बहते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर इस बात की तैयारी हो रही होती है कि अर्थी कैसे जल्द-से-जल्द चिता बने।" - इसी आलेख से

ग्रामीण रोजगार की गारंटी का योजना में बदल जाना 

'मनरेगा' के बदले 'वीबी जी राम जी' लाया जाना केंद्र सरकार के कई उद्देश्यों की पूर्ति एक ही साथ करता है। इसीलिए उसने विपक्ष के भारी विरोध को बिल्कुल अनसुना कर दिया। कैसे? पढ़ें इस लेख में।

इन दिनों : शिक्षा में शस्त्र और शास्त्र का द्वंद्व

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"भीष्म ने कृपाचार्य से पूछा कि पांडव और कौरव को किस-किस चीज की शिक्षा दे रहे हैं? कृपाचार्य ने उल्लसित होकर उत्तर दिया कि इन्हें मल्ल युद्ध, धनुर्धर विद्या और शस्त्र संचालन की अनेक विद्याएँ दी जा रही हैं। भीष्म पितामह चिंतित हुए।" क्यों? पढ़िए इस आलेख में