Category जन पत्रकारिता

इन दिनों : आँधी में भी गाँधी जी

man in black and white plaid shirt wearing eyeglasses
"डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर सभा हो और गांधी का ज़िक्र न हो, यह असंभव है। पूना पैक्ट के संदर्भ में गांधी पर कटाक्ष करना तो स्वभाव में शामिल हो गया है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : रोपे पेड़ बबूल के तो आम कहाँ से होय

gray printing paper on white surface
"हर जाति ने अपने नायक ढूँढ लिया है। आज़ादी की लड़ाई में वैसे नायक ढूँढे जाते थे, जिन्होंने देश के लिए शहादत दी हो। अब जब खा-पीकर तगड़े हो रहे हैं तो देखादेखी हरेक जाति ने अपने-अपने नायकों की तलाश शुरू की।" - इसी आलेख से

इन दिनों : एक बार, जाल फेंक रे मछेरे

Man in blue shirt casting fishing net into vibrant ocean waves, showcasing traditional fishing techniques.
"हर क्षण हम थोड़ा-थोड़ा जीते और मरते जाते हैं। जो चीज़ें छूट जाती हैं, वे मर ही तो जाती हैं। अपने अंदर मृत्यु हर वक़्त नाचती रहती है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : अगर मैं रुक गई अभी तो जा न पाऊँगी कभी….

आशा भोंसले ने फ़िल्म इंडस्ट्री में अस्सी वर्ष बिताए और बीस भाषाओं में बारह हज़ार से अधिक गीत गाये। वे अब हमारे बीच नहीं हैं। उन्हीं की याद करते हुए यह आलेख।

इन दिनों : डॉ अम्बेडकर को याद करते हुए

"हिन्दू समाज का जो भयानक दुर्गुण है, वह जाति ही है। जाति को क़ायम रखते हुए कोई हिंदू अपनी श्रेष्ठता का दावा नहीं कर सकता।" इसी आलेख से

इन दिनों : संवैधानिक मताधिकार और चुनाव आयोग के ठहाके

एआई द्वारा निर्मित प्रतीकात्मक चित्र
"आज़ादी मिली तो भारतीयों को वयस्क मताधिकार मिला। संविधान ने गारंटी दी कि हर भारतीय को वोट देने का अधिकार है और सभी के वोट बराबर होंगे। संविधान के इस मूलभूत अधिकार को चुनाव आयोग ही नष्ट कर रहा है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : अनासक्ति और कामना 

A tranquil Buddha statue surrounded by lush greenery and vibrant plants in a serene garden.
"संसार से मुक्त होने की कामना भी क्या एक कामना नहीं है? मनुष्य भावनाओं और विचारों की दुनिया में छटपटाता रहता है। जन्म लेता है तो मन विराट रहता है।  परिवार और समाज के बीच रहते हुए संकीर्ण होता जाता है।" -इसी आलेख से

इन दिनों : जाति-श्रेष्ठता और राष्ट्र की छाती से बहते लहू

a close up of a typewriter with a paper on it
"हम एक अँधेरी गुफा में धँसते जा रहे हैं, जहाँ अपनी मौत का ही उत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं।" - इसी आलेख से

शिक्षा नीति 2020 और सामाजिक विभेद

नीति राजसत्ता की वह परिकल्पना होती है, जो यह दिखाती है कि व्यवस्था को किन रास्तों से होकर कहाँ तक ले जाना है। इसकी भूमिका दिशा-निर्देशक की होती है। राज्य नीतियाँ बनाता है और फिर उन नीतियों को अमल में लाने के लिए क्रियान्वयन की योजना का निर्माण करता है। यद्यपि नीतियाँ न तो बाध्यकारी होती हैं और न ही उनका कोई कानूनी आधार होता है। फिर भी एक नैतिक दवाब बनाने में इसकी भूमिका होती है। अन्य नीतियों की तरह इस शिक्षा नीति का भी यही महत्व है यह शिक्षा का अवसर मुहैया कराने और उसका परिणाम प्राप्त करने के दृष्टिकोण को उजागर करती है।

इन दिनों : युद्ध के ख़िलाफ़ वायलिन और शहनाई

"युद्ध अगर बदतमीजों के हथियार हैं तो गुनगुनाना इंसानों के। सभ्यताएँ गुनगुनाने से समृद्ध होंगी।" - इसी आलेख से