Category विश्लेषण

हज़ारों करोड़ का चंदा, चुनिंदा कंपनियाँ और वही दल—क्या भारत का लोकतंत्र अब अमीरों का खेल बन चुका है?

"सवाल सीधा है और असहज करने वाला भी— भारत का लोकतंत्र किसके लिए काम कर रहा है? उस आम नागरिक के लिए, जो टैक्स देता है, वोट देता है और नियम मानता है? या फिर उन कॉरपोरेट कंपनियों के लिए, जो राजनीतिक दलों को हज़ारों करोड़ रुपये का चंदा देकर नीतियों तक सीधी पहुँच बना लेती हैं?" - इसी आलेख से

भारत पढ़ाकुओं का सिरमौर कैसे है?

दुनिया में सबसे अधिक पढ़नेवाले देशों में भारत का स्थान दूसरा है। जबकि यहाँ बमुश्किल 10 प्रतिशत लोग मैट्रिक पास हैं। उनकी पढ़ाई का स्तर भी श्लाघनीय नहीं है। तो फिर वे कौन हैं, जिनके कारण भारत दुनिया का दूसरा सबसे पढ़ाकू देश है? - पढ़िए इस आलेख में।