ईरान–अमेरिका टकराव: लोकतंत्र का ढोंग या साम्राज्यवाद की भूख?

"जिस भूमंडलीकरण के दौर में हमें बताया गया था कि अब दुनिया “मुक्त बाजार” से चलेगी, विश्व में सह-अस्तित्व संभव है द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतराष्ट्रीय कानून और UNO के गठन का उद्देश्य भी यही बताया गया था लेकिन वह भ्रम धीरे-धीरे टूट रहा है।" इसी आलेख से
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अमर नाथ
अमर नाथ

शिक्षक, भौतिक बिज्ञान
कोषाध्यक्ष, बिहार राज्य समिति, एटक

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3 Comments

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